फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलौनी की समस्या से इत्र कारोबारी परेशान

विज्ञापन
जलौनी की कमी से ठंडा पड़ा इत्र कारखाना। - फोटो : KANNAUJ
विज्ञापन
कन्नौज। लॉकडाउन में ठप पड़ा इत्र कारोबार अभी भी संकट में फंसा है। छोटे उद्योगों को शुरू करने की शासन ने स्वीकृति तो दी है लेकिन संसाधन कहां से मुहैया हों, इस पर कोई निर्णय नहीं किया है। संसाधनों की कमी से शहर का मुख्य इत्र कारोबार पटरी पर नहीं आ पा रहा है। कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलौनी (लकड़ी और कंडे) की है। इनकी कमी के कारण कारखानों की भट्ठियां ठंडी पड़ी हैं।
विज्ञापन

लॉकडाउन में प्रशासन ने इत्र कारखानों में अतर बनने की अनुमति दी है। इससे श्रमिकों से लेकर फूलों की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत मिली। पूरा मामला जलौनी की उपलब्धता पर अटक गया है। जलौनी उपलब्ध कैसे हो, इसके लिए एसोसिएशन के लोगों को डीएम से बात भी करनी थी। जिलाधिकारी की तबीयत ठीक न होने से वार्ता नहीं हो सकी है। इसी से इत्र उत्पादन शुरू नहीं हो सका।
उधर, फूलों की खेती करने वाले किसान भी परेशान हैं। फूल तैयार हैं, उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इत्र कारोबारी जलौनी उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने मांग कर रहे हैं। इत्र कारोबारियों का कहना है कि जलौनी जिन लोगों को उपलब्ध करानी है वह लॉकडाउन में फंसे हैं। इन लोगों को पास जारी नहीं हुए हैं। बिना जलौनी के कारोबार चालू करना संभव नहीं है। द अतर्स एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के महासचिव पवन त्रिवेदी ने बताया कि गैरजनपदों के अलावा स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों से गोबर के कंडों और लकड़ियों की खेप कारखानों में आती है। लॉकडाउन में प्रशासन की ओर से कंडों और लकड़ियों के व्यापारियों को बिक्री की अनुमति नहीं दी गई है। इससे खेप नहीं पहुंच रही है। इसके चलते इत्र कारोबार ठप पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें