वीवीआईपी जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का
विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। कन्नौज जिला बनने के बाद 18 साल के
अंतराल में अध्यक्ष पद की कुर्सी पर महिलाओं का ही दबदबा रहा है। अब तक
मात्र एक बार ही पुरुष जनप्रतिनिधि को जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का मौका
मिला है।
दो बार संचालन समिति गठित हुई, तो दो बार जिलाधिकारियों के पास भी
चार्ज रहा है। कन्नौज जिला पंचायत के पहले अध्यक्ष गांव निजामपुर
निवासी कप्तान सिंह यादव 1998 में रहे। उनका करीब एक साल का कार्यकाल रहा।
इसके बाद 1998 में ही तालग्राम क्षेत्र के गांव भवानीसराय निवासी ममता
कनौजिया जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं।
वर्ष 2000 में तत्कालीन जिलाधिकारी
बीबी सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार संभालना पड़ा। इसी तरह
तत्कालीन जिलाधिकारी जेएन मिश्र ने भी कुछ दिनों के लिए जिला पंचायत के
अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद छिबरामऊ निवासी पुष्पा
राजपूत को जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का मौका मिला।
इसके बाद संचालन समिति
गठित की गई, जिसमें पूर्व विधायक कल्यान सिंह के पुत्र उदय प्रताप सिंह,
ममता कनौजिया एवं कांती देवी शामिल रहीं। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी
डा. आरके भटनागर को जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्य मिला। वर्ष 2006 में जिला
पंचायत अध्यक्ष ममता कनौजिया अध्यक्ष की कुर्सी पर पुन: पहुंची।
वर्ष 2012
में बसपा की मुन्नी अंबेडकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। बाद में एक बार फिर
संचालन समिति गठित करनी पड़ी, जिसमें सुनीता दोहरे, प्रताप सिंह यादव,
मोहन सिंह यादव को शामिल किया गया। इसके बाद पहली बार सदर विधायक की पत्नी
सुनीता दोहरे को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी मिली।
राजनीति के लिहाज
से देखा जाए तो सपा का इस पद पर बोलबाला रहा। कप्तान सिंह यादव सपा से
छिबरामऊ के विधायक भी रहे, जबकि ममता कनौजिया और सुनीता दोहरे भी सपा से
जुड़ी हैं। सुनीता दोहरे के पति सपा से सदर विधायक भी हैं। वहीं मुन्नी
अंबेडकर ने पहली बार जिला पंचायत में बहुजन समाज पार्टी का परचम फहराया
था।
भाजपा से जुड़े पूर्व विधायक कैलाश राजपूत के भाई की पत्नी पुष्पा भी
जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर रह चुकी हैं। राजनैतिक दलों में जिला पंचायत
अध्यक्ष को लेकर खींचतान भी रही। बताया जाता है कि जब-जब सत्ता परिवर्तन
हुआ तब तब जिला पंचायत अध्यक्ष को भी बदलना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव भी
पारित हुए। कई नेताओं के बीच तनातनी का कारण भी यह कुर्सी रही है।