मानीमऊ/कन्नौज। गंगा और काली नदी के उफान से गुरुवार को कटरी क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें और बढ़ने लगी हैं। बाढ़ का पानी घरों में घुसने से गृहस्थी बर्बाद हो रही हैं। जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने सड़कों पर डेरा जमा लिया है। हालात इतने खराब हो गए कि कटरी गंगपुर का सचिवालय पानी से घिर कर टापू बन गया है।
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और काली नदी के उफान ने तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा दी है। महादेवी घाट पर गंगा का जलस्तर 125.760 मीटर दर्ज किया गया। नदी खतरे के निशान से महज 0.40 मीटर नीचे बह रही है। चौधरी चरण सिंह बैराज से बुधवार सुबह छोड़े गए 1,11,969 व गुरुवार सुबह 1,05,633 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसे देखते हुए आने वाले एक दो दिन में जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की संभावना है।
जलस्तर बढ़ने से गंगा और काली नदी का बहाव एक हो गया है, जिसका असर आसपास के तटीय गांवों में दिखाई देने लगा है। कासिमपुर गांव का मार्ग पूरी तरह जलमग्न है। गांव के अंदर कई मकानों में पानी भर गया है। ग्रामीणों ने पॉलिथीन तानकर सड़क किनारे डेरा जमा लिया बक्शीपुर्वा गांव में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। चौरा चांदपुर गांव की सड़क पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हो गया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चौराचांदपुर की गोशाला को गांव से बाहर बंदगी पीर दरगाह के पास एक खेत में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं चौराचांदपुर और गुमटिया गांव के बीच मार्ग पर बनी पुलिया भी पूरी तरह डूब गई है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है और नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों की दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं।
गोशाला को खेत में शिफ्ट किया गया
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चौराचांदपुर स्थित गोशाला में पानी भर गया है। गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए गांव से बाहर बंदगी पीर दरगाह के पास एक खेत में गोवंशों को रखा गया है।
वर्जन
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। घाटों की निरंतर निगरानी कराई जा रही है। तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों से महादेवी घाट पर बने आश्रय स्थल में जाने के लिए कहा गया है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-वैभव गुप्ता, उपजिलाधिकारी सदर