ग्राम पंचायत मुखरा में मनरेगा के तहत समतलीकरण करते श्रमिक।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कोरोना संक्रमण से शहरों से पलायन कर घर पहुंचे लोगों को गांव में ही काम मिलेगा। मजदूरों व कामगारों का जॉब कार्ड बनवाकर रोजगार मुहैया कराया जाएगा। शासन के फरमान के बाद विकास महकमा हरकत में आ गया है। रोजगार सेवकों को ऐसे लोगों को चिह्नित कर मनरेगा जॉब कार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बाहर से आए जिन मजदूरों के परिवार के नाम जॉबकार्ड बने हैं, उनमें मजदूर का नाम जोड़ा जा रहा है। अभी तक 412 श्रमिकों के नए जॉबकार्ड बनाए गए हैं। मनरेगा से रास्तों का समतलीकरण और जलस्रोतों को गहरा करने का काम किया जा रहा है।
सीडीओ प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 1.5 लाख से अधिक जॉबकार्ड धारक हैं। इसमें लगभग 84 हजार सक्रिय हैं। इन्हें पिछले महीने मुफ्त में राशन दिया गया था। लॉकडाउन में नौ हजार से अधिक मजदूर गैरप्रांतों में लौटे हैं। इन्हें उनके गांव में ही रोजगार मुहैया कराया जाएगा। फिलहाल मनरेगा से काम दिया जा रहा है। सीडीओ ने बताया कि जिले में 504 ग्राम पंचायतें हैं। 376 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से 21 अप्रैल से काम शुरू करा दिए गए हैं। अलग-अलग जगह 591 काम कराए जा रहे हैं। 9,645 मजदूर काम कर रहे हैं। 412 श्रमिकों के नए जॉबकार्ड बनाकर काम दिया गया है। सभी मजदूरों का एक सप्ताह में भुगतान कर दिया जाएगा।
एक सप्ताह बाद काम में आएगी तेजी
इस समय गेहूं की कटाई और मड़ाई का काम चल रहा है। ज्यादातर मजदूर इसमें लगे हैं। एक सप्ताह में कटाई और मड़ाई का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद मनरेगा के कामों में और तेजी आएगी।
मजदूर सामाजिक दूरी का करें पालन
सीडीओ ने बताया कि एक ग्राम पंचायत एक से अधिक काम एक साथ करा सकती है। अफसरों को सामाजिक दूरी का पालन कराना होगा। बाहर से आने वाले मजदूर के परिवार के नाम जॉबकार्ड बना है तो उसका नाम उस कार्ड में जोड़ा जाएगा। कई मजदूरों के नाम परिवार के जॉबकार्ड में जोड़े जा चुके हैं।