तिर्वा। इंडियन बैंक के बैंक मित्र पर उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जमा-निकासी में गड़बड़ी के बाद अब फर्जी एफडी रसीद थमाकर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। 10.50 लाख रुपये की एफडी की अवधि पूरी होने पर जब उपभोक्ता बैंक पहुंचा तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
आरोपी बैंक मित्र विक्रम राजवीर आठ सितंबर से फरार बताया जा रहा है। ठगी के शिकार लोग अब धीरे-धीरे बैंक पहुंचकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इंडियन बैंक के बैंक मित्र के रूप में तैनात विक्रम राजवीर पर कई उपभोक्ताओं की रकम हड़पने का आरोप है। बताया जा रहा है कि वह उपभोक्ताओं से नगद रकम लेकर पासबुक में हाथ से एंट्री कर देता था और कंप्यूटर में रकम जमा नहीं करता था। एफडी के मामले में भी उसने फर्जी रसीद थमा दी।
पीड़ितों का कहना है कि बैंक मित्र बैंक परिसर में ही मौजूद रहता था और जैसे ही कोई उपभोक्ता अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचता, वह उसे अपने पास बुला लेता और समाधान का आश्वासन देकर वापस भेज देता था। इस कारण लंबे समय तक उसका खेल चलता रहा। अब जब एफडी की अवधि पूरी हुई तो मामला खुला। बैंक अधिकारियों ने बताया कि मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है और खातों की जांच कराई जा रही है।
दो भाइयों के नाम पर बनाई फर्जी एफडी
कस्बे के शास्त्री नगर निवासी राम सिंह और उनके भाई शिव सिंह ठगी के शिकार हुए हैं। आरोप है कि बैंक मित्र ने राम सिंह के नाम नौ लाख और शिव सिंह के नाम 1.50 लाख की एफडी बनाई थी। राम सिंह को एफडी की फोटो कॉपी दी गई, मूल प्रति अपने पास रख ली। मैच्योरिटी पर बैंक पहुंचने पर पता चला कि खाते में कोई एफडी नहीं है।
पासबुक में हाथ से चढ़ाता था रकम
उपभोक्ताओं ने बताया कि बैंक मित्र पासबुक में कंप्यूटर प्रिंट की जगह हाथ से रकम लिख देता था। ग्राहक हाथ की लिखी एंट्री को ही सही मान लेते थे, जबकि बैंक के सिस्टम में कोई लेन-देन दर्ज नहीं होता था।
वर्जन
मामला संज्ञान में आया है, लेकिन अभी तक किसी पीड़ित ने लिखित तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुमार शुक्ला, प्रभारी निरीक्षक