चपुन्ना। विकास खंड हसेरन के गांव जरिहापुर गांव में 21 जून को अधूरे पड़े नाले को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें दोनों पक्षों से 16 लोग घायल हुए थे। विवाद के बाद भी प्रशासन ने इस तालाब की सुध नहीं ली। पानी निकासी का इंतजाम न होने के कारण गांव के 50 घरों में तालाब का पानी भरा है। जलभराव के बीच यह लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
ग्राम जरिहापुर स्थित तालाब के पानी निकासी के लिए जिला पंचायत से नाले का निर्माण स्वीकृत है। वर्ष 2020 में जिला पंचायत ने नाले का निर्माण शुरू कराया था। गांव में नाले का कुछ हिस्सा बन चुका है। लोगों के विरोध के चलते गांव में 300 मीटर नाला अधूरा बना पड़ा है जबकि गांव के बाहर अरिंद नदी तक नाला निर्माण पूरा हो चुका है। अधूरे पड़े नाले के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी से की थी। 20 जून को सीएम कार्यालय के निर्देशों के अनुपालन में एडीओ राजबहादुर गांव में जांच करने पहुंचे थे।
उसी दौरान पाल व ब्राह्मण समाज के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें दोनों पक्षों से 16 लोग घायल हुए थे। ग्रामीणों की मानें तो गांव के कुछ लोगों ने नाले की जमीन पर मकान बना लिए हैं। यदि नाले का निर्माण होता है तो नाले की जमीन पर बने मकान गिराए जाएंगे। ऐसे में नाले की जमीन पर कब्जा कर मकान बनाकर रह रहे लोग नाले का निर्माण नहीं होने दे रहे हैं। पिछले दिनों हुई बरसात के कारण तालाब जलमग्न हो गया है। निकासी का इंतजाम न होने के कारण आसपास के घरों में पानी भरा हुआ है। विवाद को एक महीना बीतने को है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए दोबारा कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।