कन्नौज। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से देश भर में मौजूद शत्रु संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा के बाद गुरुवार को तहसील व नगर क्षेत्र में शत्रु संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जाधारियों में खलबली मच गई है। उधर, एसडीएम छिबरामऊ पाकिस्तान जा चुके लोगों की 74 बीघा जमीन को राज्य सरकार में दर्ज करा चुके है। वहीं इस घोषणा के बाद से अवैध रूप से कब्जा कर रहने वाले लोगों में काफी दहशत है। उनका कहना है कि हमलोग इस जमीन का पैसा दे चुके है।
देश के बंटवारे के समय जिले से कई लोग पाकिस्तान चले गए थे, जिनकी संपत्तियां छिबरामऊ देहात, दीपकपुर मोहम्मदाबाद, नगर पालिका छिबरामऊ, सौरिख, कायमपुर, समधन, सकरावा तथा इस्माइलपुर में मौजूद थीं। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी ने 74 बीघा जमीन को राज्य सरकार में दर्ज करा दिया था तथा इन सभी जमीनों को औपचारिक रूप से शत्रु संपत्ति घोषित कराने के लिए भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय में पत्र भी भेजा था।
पाकिस्तान गए इन लोगों की बेशकीमती जमीनों पर कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा किए थे। खेल तब खुला जब उक्त जमीन की बिक्री शुरू हो गई और दाखिल खारिज के लिए मामला न्यायालय में पहुंचा था। उसके बाद इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की गई। करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को प्रशासन ने राज्य सरकार में दर्ज कर दिया था।
जमीन तो प्रशासन ने खाली करवा ली, कैसे खाली होंगे मकान
शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज जमीन को तो प्रशासन ने खाली तो करवा ली लेकिन कई जगहों पर मकान बने खड़े हैं। अब इनको गिरवाना प्रशासन के लिए चुनौती है। जिनके मकान हैं, वह कह रहे हैं कि हमने खरीदी है। अब सवाल यह है कि यह शत्रु संपत्ति है तो इसका बैनामा किसने किया। ऐसे में मकानों को गिराने की कार्रवाई में कोर्ट रोड़ा बन सकता है। गुरसहायगंज, समधन और इस्माइलपुर में कई शत्रु संपत्तियों पर मकान बने खड़े हैं। हालांकि प्रशासन ने इनको चिह्नित कर लिया है। एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 1962 की कोई शत्रु संपत्ति नहीं है। जो हैं वह वर्ष 1947 की हैं। इनमें अधिकांश का चिन्हीकरण कर कब्जामुक्त करा लिया गया है। जो बचीं हैं, वह भी जल्द खाली कराई जाएंगीं।
वर्जन
अभी गृह मंत्रालय से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही शत्रु संपत्तियों की नीलामी कराई जाएगी। इसके लिए एडीएम के नेतृत्व में कमेटी बनाई जाएगी।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी