तिर्वा। महिला यूरेटर (मूत्रवाहिनी) में सिकुड़न आ गई और संक्रमण गुर्दे तक पहुंच गया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज की टीम ने महिला का ऑपरेशन किया, जिससे उसे एक नई जिंदगी मिल गई। डॉक्टरों ने बताया कि यह गंभीर ऑपरेशन था, जिसमें प्राइवेट अस्पताल में लाखों रुपये का खर्च आता है।
क्षेत्र के फगुहा भट्ठा गांव निवासी शिवकांति देवी (55) लंबे समय से पेशाब करने में असहनीय दर्द और कठिनाइयों का सामना कर रही थीं। करीब 10 दिन पहले परिजन उन्हें डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। विभागाध्यक्ष डॉ. निखिल गुप्ता ने महिला की आवश्यक जांचें कराकर तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। डॉक्टर की राय पर परिजनों ने महिला को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया। सोमवार को डॉ. निखिल गुप्ता की अगुवाई में डॉ. निशांत रंजन, डॉ. आकाश वर्मा, स्टाफ नर्स अनुपमा, नफिशा की टीम ने सर्जरी कर महिला की पेशाब की नली को दोबारा मूत्राशय से जोड़ते हुए नया रास्ता बनाया, जिससे अब मूत्र प्रवाह सामान्य हो सकेगा।
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और महिला की हालत अब स्थिर है। महिला के तीमारदारों ने डॉक्टरों की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि पेशाब की नली की सिकुड़न के कारण महिला को बहुत अधिक पीड़ा हो रही थी और गुर्दे में संक्रमण फैल रहा था। अब उनकी स्थिति बेहतर है और जल्दी ही उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे जटिल ऑपरेशन प्राइवेट अस्पतालों में कराने पर तीन से चार लाख रुपये तक खर्च आता है। प्राचार्य डॉ. सीपी पाल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग लगातार जटिल ऑपरेशन कर लोगों को राहत पहुंचा रहा है। मेडिकल कॉलेज में लगातार सुविधाएं बेहतर हो रही हैं।