नवरात्र पर्व पर सिद्धपीठ मां काली देवी मंदिर में
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पूरे दिन मंदिर में श्रद्धालुओं का
तांता लगा रहता है। मान्यता है कि मां काली अपने भक्तों की हर मुराद पूरी
करती है। इस वजह से लोग श्रद्धा पूर्वक मां के दरबार में मत्था टेककर
मनौतिया मांगते हैं।
मुरादें पूरी हो जाने पर हवन-पूजन व भंडारे का भी
सिलसिला चलता है। खैरनगर रोड पर घनी बस्ती के मध्य मां काली शिव मंदिर
स्थापित है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था।
उस दौरान यह सुनसान क्षेत्र था। चारों ओर घने बांस के जंगल थे। क्षेत्र में
महामारी का प्रकोप चलता रहता था।
मंदिर के सर्वाकार अजय चतुर्वेदी के
मुताबिक, तिर्वा रियासत के पूर्व राजाओं को मां काली ने स्वप्न में आदेश
दिया कि उनके मंदिर की स्थापना कराएं, तभी क्षेत्र में महामारी की समस्या
से निजात मिलेगी। उसी दौरान पूर्व राजाओं द्वारा सिद्धपीठ मां अन्नपूर्णा
देवी मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था।
इस वजह से इस मंदिर के निर्माण की
जिम्मेदारी चतुर्वेदी परिवार के पूर्वजों को दी गई। कलकत्ता से मां काली
की मूर्ति लाकर विधि-विधान के साथ उसकी स्थापना कर मंदिर का निर्माण कराया
गया। बाद में बगल में शिव के मंदिर का भी निर्माण किया गया।
सर्वाकार के
मुताबिक मां काली की स्थापना के बाद क्षेत्र में कभी भी महामारी का प्रकोप
नहीं हुआ। आज भी मान्यता है कि इस मंदिर में श्रद्धा पूर्वक जो भक्त मां से
मन्नते मांगते हैं, उनकी मुरादें मां पूरी करती है। तिर्वा के अलावा आसपास
के ग्रामीण अंचलों से भी श्रद्धालु भारी तादात में दर्शन करने आते हैं।
नवरात्र पर्वों पर विशेष भीड़भाड़ रहती है। मंदिर परिसर में इन दिनों
सुंदरीकरण का भी काम चल रहा है। मंदिर के पुजारी बाबा ब्रह्मचारी भक्तों को
विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन कराते हैं।