कन्नौज। दूसरे के दस्तावेज लगाकर फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने के मामले में एक और बात सामने आई है कि मिर्जापुर डीआईओएस कार्यालय से नौकरी करने वाली छात्रा के स्थायी पते पर पिता के आधार कार्ड के सत्यापन के लिए करीब छह बार डाक से दस्तावेज भेजे गए थे। अभ्यर्थी के पिता के घर पर नहीं होने से हर बार डाक लौट गई। जब जेडी ऑफिस मिर्जापुर से डॉ. मनोज के पास सत्यापन के लिए फोन आया तो शिकायतकर्ता को मामले की जानकारी हुई। हालांकि इस बारे में शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें पूर्व में यह पता चला था कि तीन या चार बार उनके पैतृक घर पर डाकिया आया और उनके न होने पर डाक परिजनों को दिए बिना ही लौट गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कुछ दिन पूर्व ही ज्वाइन डायरेक्टर के यहां से उन्हें फोन आया था कि बेटी प्रियंका 2015 से एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी कर रही है। आप दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं कर रहे हैं। इस पर वे चौक गए और कहा कि बेटी तो लंदन में रहती है वह नौकरी नहीं कर रही है। इसके बाद उन्होंने बेटी के दस्तावेज लगाकर नौकरी में फर्जीवाड़ा होने की शिकायत करते हुए जिला प्रशासन से न्याय दिलाने की गुहार लगाई।
डॉ. मनोज ने बताया कि 2015 के दौरान उनकी बेटी का चयन सहायक शिक्षक पद पर हुआ था। इसके लिए कन्नौज बीएसए कार्यालय में काउंसलिंग भी हुई थी। इस दौरान उसके सभी दस्तावेजों की फाइल बीएसए कार्यालय में जमा करा ली गई थी, इसके बाद तत्कालीन बीएसए ने उनकी बेटी को तकनीकी वजह बताते हुए जॉइनिंग लेटर नहीं दिया। कई बार बेटी के दस्तावेजों की फाइल पाने के लिए डॉ. मनोज को बीएसए कार्यालय जाना पड़ा था। बीएसए कार्यालय के द्वारा करीब चार महीने बाद शिकायतकर्ता को उनकी बेटी के दस्तावेजों की फाइल दी मिली।
डॉ. मनोज ने बीएसए कार्यालय के अलावा कभी अन्य कार्यालय में बेटी के संपूर्ण दस्तावेजों की फाइल नहीं दी है, ऐसे में बेटी के दस्तावेज कैसे दूसरी जगह चले गए हैं। इस पर जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने मामले की जांच बीएसए को सौंपी है।
फर्जीवाड़ा करने वालों की मिलीभगत
विंध्याचल मंडल मिर्जापुर के संयुक्त निदेशक कामताराम पाल का कहना है कि प्रियंका प्रजापति के दस्तावेजों का सत्यापन कराया तो एक फर्जीवाड़ा सामने आया। उनका कहना है कि सत्यापन पत्र को प्रियंका के पैतृक निवास पर कई बार डाक के जारिए भेजा गया। फर्जीवाड़ा करने वालों ने वापस कर दिया। फोन पर जानकारी मिलने के बाद शानिवार को पिता ने अपना जवाब डाक से भेज है।
जांच के बाद खुल सकते हैं शिक्षक, अधिकारी और बाबू के कारनामे
कामताराम पाल ने बताया कि विधानसभा चुनाव के चलते अधिकारी चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं। चुनाव के बाद टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी। इसके लिए टीम कन्नौज बीएसए कार्यालय भी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक एक शिक्षक, अधिकारी और एक बाबू की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के जरिये दूसरी युवती को नियुक्ति देकर नौकरी दी गई है।