वर्ष 2012 में जिले में हुए लोकसभा उपचुनाव के नामांकन के दौरान डिंपल यादव के खिलाफ पर्चा दाखिल करने वाले प्रत्याशी के अपहरण मामले की जांच के लिए सीबीसीआईडी ने डेरा डाल दिया है। सीबीसीसीआईडी के अधिकारियों ने गोपनीय ढंग से नामांकन के दौरान मौजूद रहने वाले कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से पूछताछ की।
2012 में प्रदेश का सीएम बनने के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दिया था। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने नामांकन किया था। इस दौरान वोटर्स पार्टी इंटरनेशल की ओर से प्रभात पांडेय और भाजपा से जगदेव यादव ने नामांकन पत्र दाखिल करने का दावा किया था, लेकिन डिंपल यादव के खिलाफ नामांकन पत्र कोई भी दाखिल नहीं कर सका था। डिंपल यादव र्निविरोध सांसद घोषित हुई थीं।
छह माह बाद प्रभात पांडेय ने वोटर्स पाटी इंटरनेशनल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत गांधी की सहयोग से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में वाद दायर किया था। इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अब सीबीसीआईडी ने इस मामले में जांच तेज की है। रविवार को इंपेक्टर नवीन कुमार टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने इस दौरान नामांकन के दौरान मौजूद रहने वाले समाजवादी व अन्य दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पूछताछ की। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ की।
अपहर्ताओं मे 800 लोग
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रत्याशी प्रभात पांडेय ने नामांकन करने जाते समय कलक्ट्रेट गेट के पास अपने अपहरण का आरोप लगाया है। याचिका में उन्होंने बताया है कि अपहर्ताओं में करीब 800 सपा नेता और कार्यकर्ता थे। करीब 100 कददवर नेताओं को चिह्नित करने का दावा भी किया है।