कन्नौज। जिले की तीन विधानसभाओं पर भाजपा हाईकमान ने टिकट घोषित कर दिया। छिबरामऊ से मौजूदा विधायक अर्चना पांडेय और तिर्वा से मौजूदा विधायक कैलाश राजपूत को टिकट दिया है। वहीं सदर सीट से भाजपा ने पूर्व आईपीएस अफसर असीम अरुण को मैदान से उतारा है। असीम अरुण के चुनाव लड़ने से यह सीट प्रदेश में चर्चित है। इससे पहले भाजपा सदर सीट से बनवारी लाल को मैदान में उतारती थी। तीन बार लगातार विधायक बने थे। पिछले तीन बार उन्हें चुनाव में लगातार हार मिली है।
पिता की तरह काबिल अफसर के रूप में असीम की पहचान
सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी असीम अरुण के पिता श्रीराम अरुण प्रदेश के दो बार डीजीपी रहे चुके हैं। असीम अरुण के पिता 1993 बैच के आईपीएस थे। 1997 और 1999 में प्रदेश के डीजीपी रहे थे। 1971 में बांग्लादेश फ्रंटियर पीएसी के वे सेनानायक रहे थे। 2000 में सेवानिवृत्त होने के बाद पिता 2001 से 2004 तक एससी एसएसटी आयोग अध्यक्ष भी रहे थे। पिता की तरह 1994 बैच के आईपीएस अफसर असीम अरुण की महकमे के बेहतर छवि के अफसरों की सूची में रहे हैं। उन्होंने स्वाट का गठन किया। इसके अलावा एसटीएफ और 112 डायल पुलिस सेवा में सराहनीय कार्य किए हैं। कुछ दिनों तक वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा में भी रहे हैं। चुनाव मैदान में उतरने के बाद अब चर्चा है कि पुलिस महकमे में कई आधुनिक बदलाव करने वाले अफसर राजनीति में सफल होकर कितना बदलाव करते हैं।
एक बार फिर से अर्चना पर भाजपा ने जताया भरोसा
छिबरामऊ। भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने विधानसभा क्षेत्र छिबरामऊ से विधायक अर्चना पांडेय पर भरोसा कायम रखते हुए दोबारा टिकट की घोषणा कर दी है। हालांकि अर्चना पांडेय पहले से ही टिकट को लेकर आश्वस्त थीं और पिछले कई महीनों से इलाके में लगातार जनसंपर्क कर रही थीं।
भाजपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व सहकारिता मंत्री रामप्रकाश त्रिपाठी के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को पुत्री अर्चना पांडेय ने संभाल लिया है। साल 2012 के विधानसभा में उन्हें पार्टी ने वरीयता देते हुए प्रत्याशी घोषित किया, हालांकि इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा और 2017 के चुनाव में पार्टी ने भरोसा जताते उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। मोदी लहर के चलते अर्चना पांडेय ने भारी मतों से बसपा के ताहिर हुसैन सिद्दीकी को हराकर जीत हासिल की। उन्हें योगी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में आबकारी, मद्य निषेध व खनन राज्यमंत्री बनाया गया। अर्चना पांडेय को पहली महिला विधायक एवं राज्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विधानसभा चुनाव 2022 में पार्टी ने दोबारा अर्चना पांडेय विश्वास जताते हुए चुनाव मैदान में उतार दिया है। उनकी टिकट फाइनल होने की घोषणा होते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
वकालत से पकड़ी राजनीति की राह, भाजपा का खोला था खाता
कन्नौज। मौजूदा तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत ने 1996 में भाजपा के टिकट से पहली बार तिर्वा विधानसभा का चुनाव लड़ा था। जनता को रिझाने में वह सफल हुए और भाजपा का पहली बार इसी सीट परचम लहराया। इसके बाद 2007 में वह इसी सीट से बसपा की टिकट पर चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। बसपा का अस्तित्व गिरता देखकर एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया। वर्ष 2017 में वे फिर भाजपा से चुनाव लड़े और सपा के शिक्षा मंत्री विजय बहादुर पाल को हराने में कामयाब रहे। जिले में कैलाश राजपूत को राजनीति के मौसम वैज्ञानिक के नाम से भी जाना जाता है। यह जिस पार्टी से चुनाव लड़ते है। वह पार्टी सत्ता पर काबिज होती है और कैलाश राजपूत को सत्ता सुख का लाभ मिलता है। इस बार फिर वह मैदान में है।