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बिना उपकरणों के है दंत रोग विभाग

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जिला अस्पताल के दंत रोग विभाग के बाहर बैठे मरीज व तीमारदार। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। जिला अस्पताल का दंत रोग विभाग बदहाल है। यहां जरूरी उपकरण नहीं हैं। इससे आने वाले मरीजों को दवा देकर लौटा दिया जाता है। डेंटल चेयर भी खराब हो चुकी हैं। इन हालातों में विभाग के पास दो-दो डॉक्टर होने के बाद भी मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। इस समय रोज 20 से 25 दांत के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। कोरोना काल से पहले रोजाना 40 से 50 मरीज रोजाना पहुंचते थे।
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दंत रोग विभाग कई माह से उपकरणों के अभाव से जूझ रहा है। दांत उखाड़ने में प्रयोग होने वाले उपकरण लंबे समय से नहीं हैं। कोरोना काल में दांतों का उपचार बंद होने के बाद अब शुरू हुआ तो उपकरण बाधा बने हैं। दांत उखाड़ने के दौरान काम आने वाले उपकरण न के बराबर हैं। दांतों के एक्सरे के लिए लगी मशीन बंद है। मरीज को बाहर से एक्सरे करा कर लाने के लिए कहा जाता है। इसके 100 से 250 रुपये पड़ जाते हैं। वहीं एक्सरे के बाद मरीजों को इलाज मिलने में तकरीबन दो दिन का समय लग जाता है।
एजेंसी से मांगी गई उपकरणों की कीमत: डॉ. शक्ति बसु
समस्या को लेकर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु का कहना है कि दंत विभाग में उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए विभागीय डॉक्टर से लिखित कोटेशन मांगा गया है। इनकी एजेंसी से कीमत मांगी गई है। इसके बाद उपकरणों की खरीद की जाएगी। एक्सरे मशीन भी ठीक कराई जाएगी।
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इन उपकरणों व सामग्री का है अभाव
फाइल्स: इनका रूट कैनाल के उपचार में प्रयोग होता है।
- मेटारेक्स:दांत के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा।
- कैल्शियम हाइड्राक्साइड: यह भी एक किस्म की दवा है।
-कंपोजिट फिलिंग मैटेरियल: दांतों में भरा जाने वाला मसाला।
- रूट कैनाल सीलर: इसका रूट कैनाल सील करने के लिए प्रयोग होता है।
एयर रूटर बर्स: दांत घिसने की मशीन।
- एक्सरे डेवलपर बॉक्स -एक्सरे प्लेट घुलने के प्रयोग में आता है।
- कंसरवेटिव इंस्ट्रूमेंट किट -दांतों में मसाला भरने की किट।
- एक्स्ट्राक्सन फॉरसेप कंप्लीट किट: दांत निकालने के औजार।
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