कई दिनों से चल रही पछुआ हवाओं से खेतों में बने फूस, पतेल पर चढ़ी सेम की पौध गिरकर चौपट हो गई है। तापमान बढ़ने से सेम की फसलों की फलियां छोटी होने लगी हैं। भुनगा कीट का प्रकोप भी बढ़ा है।
किसान योगेंद्र टिकरी ने बताया कि सेम की फसल को सहारा देने के लिए लकड़ी के झुरमुट व फूस के ऊपर चढ़ाई जाती है। बेल पतली होने के कारण तेज हवाओं के साथ जमीन में गिर गई है। इससे किसानों को नुकसान होने की आशंका है।
छदामीपुरवा के ब्रजपाल ने बताया कि सेम पर पहले भी माहू कीट का प्रकोप रहा है। भुनगा कीट के साथ कलियों को काफी नुकसान हुआ है। तापमान बढ़ जाने से कलियां छोटी हो रही हैं। जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
अनौगी के कृषि वैज्ञानिक डा. अमर सिंह ने बताया कि सेम को तेज हवाओं से सुरक्षित रखने के लिए मचान मजबूत बनाएं। सेम की फसल को रस्सी का सहारा देकर उसे दोबारा मचान पर चढ़ा दें। हल्की सिंचाई कर दें। इसके साथ ही सेम पर कीट नियंत्रण के लिए लिम्डा साहेलोथ्रिन की एक मिली मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें।