छिबरामऊ(कन्नौज)। लॉकडाउन के चलते रमजान के सातवें रोजे पर रोजेदारों ने घरों में नमाज अदा की। पुरानी जामा मस्जिद के पेश इमाम गौस मोहम्मद ने कहा कि रमजान अल्लाह की इबादत का महीना है।
पेश इमाम गौस मोहम्मद ने कहा कि मुस्लिमों पर रोजा रखना फर्ज है। रमजान में रोजा रखने से अल्लाह खुश होकर दुआएं कुबूल करते हैं। वहीं मोहल्ला जेरकिला स्थित रजा मस्जिद के पेश इमाम अब्दुल कुद्दूस का कहना है कि रमजान में रोजे रखने का मतलब सिर्फ खाने, पीने की चीजों से दूर रहना ही नहीं है। रोजा रखने के बाद व्यक्ति को गलत कामों से बचना चाहिए। रोजे में न तो गलत बोलना चाहिए और न ही गलत सुनें। मोहल्ला नई बस्ती स्थित नूरी मस्जिद के पेश इमाम हाफिज ईनाम का कहना है कि रमजान की इबादत में हर रोजेदार को भूख का अहसास करना चाहिए। गरीबों की भूख मिटाने की कोशिश करनी चाहिए।
एक मीनारा मस्जिद के पेश इमाम मो. फुरकान का कहना है कि रमजान माह के 30 दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत का होता है। दूसरा मगफिरत और तीसरा दोजख से आजादी दिलाने का होता है। इस महीने में रोजेदारों को झूठ नहीं बोलना चाहिए।