कन्नौज। गेहूं की फसल में पीला रतुआ (यलो रस्ट ) रोग लगने से पत्तियां पीली पड़ने लगीं हैं। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को रोग से बचाने के लिए किसान फसलों में छिड़काव कर रहे हैं। कृषि अधिकारियों के मुताबिक अधिक नमी और पोषक तत्वों की कमी से पत्तियां पीली पड़ रहीं हैं। दवाओं के छिड़काव से रोग की रोकथाम की जा सकती है।
जिले में इस बार 78 हजार हेक्टेयर में किसानों ने गेहूं की फसल की है। जनवरी में अच्छी सर्दी से गेहूं किसान खुश थे। मौजूदा समय गेहूं की फसल में पीला रतुआ लग गया है। इससे पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। कई खेतों में पत्तियां पीली होने से इनसे पाउडर की तरह पदार्थ छूटने लगा है। इससे किसान चिंतित हैं। इन्हें पैदावार प्रभावित होने का डर सता रहा है। रोग बढ़ा तो पैदावार गिरने से लागत तक निकालना मुश्किल हो जाएगा। फसल को रोग से बचाने के लिए किसान कृषि वैज्ञानिकों से राय लेकर दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। बिचपुर्वा के किसान राजेंद्र पाल ने बताया कि अभी फसल में रोग का असर बहुत ज्यादा नहीं है। अगर बाली निकलने के दौरान यह रोग बढ़ता है तो समस्या हो जाएगी। पैदावार प्रभावित होगी। रोग ज्यादा बढ़ने पर किसानों के हाथ कुछ नहीं आएगा।
नीम की पत्तियों को बिखेरने के अलावा तेल का छिड़काव करें: कृषि अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन परिहार ने बताया कि जिंक और अन्य पोषक तत्वों की कमी से फसलों की पत्तियां पीली हो रहीं हैं। किसान सिंचाई के समय नाली में यूरिया का बहाव कर खुराक दें। साथ ही फसल में नीम की पत्तियों को बिखेरने के अलावा तेल का छिड़काव करें। इससे पैदावार प्रभावित नहीं होगी।
फसल में 10 से 20 फीसदी नुकसान होता: कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञ विनय कुमार शर्मा ने बताया कि पीला रतुआ के ज्यादा प्रकोप से फसल में 10 से 20 फीसदी नुकसान होता है। इसके अलावा गेहूं की बाली पर धब्बे आ जाते हैं। दवाओं के समय से छिड़काव से रोग का असर कम हो जाता है।
ये हैं पीला रतुआ रोग के लक्षण
पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले रंग की धारी दिखाई देने लगती हैं। धीरे-धीरे पूरी पत्ती पीली हो जाती है।
पीला पाउडर जमीन पर भी गिरता देखा जा सकता है।
पहली अवस्था में यह रोग खेत में 10-15 पौधों पर गोल दायरे में शुरू होकर पूरे खेत में फैल जाता है।
तापमान बढ़ने पर पीली धारियों की निचली सतह काले रंग में बदल जाती है।