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Kannauj News: अधिवक्ता की पोस्ट ने खोली मेडिकल कॉलेज की पोल

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तिर्वा। कमर दर्द से परेशान एक अधिवक्ता को जब एमआरआई रिपोर्ट के लिए 25 दिन इंतजार करने की बात बताई गई तो उनका दर्द सोशल मीडिया तक पहुंच गया। शुक्रवार को पोस्ट वायरल हुई तो राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में आ गईं।
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इंदरगढ़ क्षेत्र के उधमपुर गांव निवासी एवं वर्तमान में सरायमीरा निवासी अधिवक्ता कौशलेंद्र त्रिपाठी 24 जून को कमर दर्द की शिकायत लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज की आर्थोपेडिक ओपीडी पहुंचे थे। चिकित्सक ने एमआरआई जांच लिखी। इसके लिए उन्होंने दो हजार रुपये जमा कर दिए। आरोप है कि जांच के बाद रिपोर्ट 17 जुलाई को देने की बात बताई गई।
ऐसे में दर्द से जूझ रहे मरीज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि इलाज शुरू होगा तो आखिर कब,मामला यहीं नहीं रुका। अधिवक्ता का आरोप है कि डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाएं न तो मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध थीं और न ही बाहर बाजार में मिल सकीं। परेशान होकर उन्होंने निजी अस्पताल का रुख किया और शुक्रवार को लखनऊ में इलाज शुरू कराया। सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताई। सपा के जिला महासचिव डॉ. रामसेवक लोधी ने कहा कि यदि सरकारी अस्पतालों में समय पर जांच और दवाएं नहीं मिलेंगी तो मरीजों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
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सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं। रोजाना 20 से अधिक एमआरआई जांचें होती हैं, जिसके चलते दबाव बढ़ जाता है। सामान्य रूप से सात से दस दिन में रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाती है। मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी।
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