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अभी और भी आ सकते गिरफ्त में, 61 बैनामों की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा

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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे। - फोटो : CHIBRAMAU
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छिबरामऊ (कन्नौज)। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए अधिगृहीत जमीनों में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया गया है। इसकी परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। 61 बैनामों की जांच आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। जानकारों का मानना है कि रिपोर्ट आने पर कुछ और गिरफ्त में आ सकते हैं।
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इसी साल 19 अगस्त को डीएम ने लेखपाल अरुण कुमार से दो लाख 23 हजार 48 रुपये, भूमि विक्रेता राजेश कुमार से पांच लाख 73 हजार छह सौ रुपये और केसर देवी से 26 लाख 12 हजार आठ सौ रुपये की वसूली करने के साथ ही दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के राजस्व विभाग को आदेश दिए थे। डीएम के आदेश के 15 दिन बाद तीन सितंबर को तहसीलदार अभिमन्यु कुमार ने तत्कालीन एसडीएम उदयवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार शिवमोहन पांडेय और ऋषिकांत राजवंशी, तत्कालीन नायब तहसीलदार अवनीश कुमार, तत्कालीन उप निबंधक प्रद्युम्न कुमार, लेखपाल अरुण कुमार व विक्रेता राजेश व केसर देवी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
सर्किल रेट के आधार पर ही लिया मुआवजा: मनोज
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए अधिगृहीत की गई भूमि की स्वामी केसर देवी के पुत्र मनोज त्रिपाठी ने बताया कि जमीन का बैनामा साल 2004 में कराया था। चौहद्दी में यह जमीन रोड की तरफ थी। इसी आधार पर स्टांप लगाया गया था। साल 2014 में यह जमीन अधिगृहीत की गई। तब सर्किल रेट के अनुसार 90 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से चार गुना मुआवजा मिला था। मां के खिलाफ गलत ढंग से मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ वह न्यायालय की शरण लेंगे।
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