कन्नौज। जुड़वां बच्चों की मां सोमवार को अपने बच्चों को वापस पाने की उम्मीद में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) कार्यालय पहुंची। यहां करीब तीन घंटे तक समिति ने महिला से गहन पूछताछ की। मां ने अपनी मजबूरियां बताते हुए बच्चों की सुपुर्दगी के लिए आवेदन सौंपा।
महिला ने बताया कि बीमारी के इलाज के लिए वह जयपुर गई थी। उस समय आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियां बच्चों की देखभाल के लिए अनुकूल नहीं थीं। उसने बच्चों को बेचने के आरोप को गलत बताया। महिला ने कहा कि उसने केवल उनकी परवरिश की चिंता में बच्चों को दूसरे परिवारों को सौंपा था। सीडब्ल्यूसी ने बच्चों के पिता, परिवार की स्थिति और आय के स्रोत पर सवाल किए।
महिला ने बताया कि गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर बच्चों का पिता उसे छोड़कर चला गया था। पूछताछ के बाद समिति ने महिला का आवेदन स्वीकार कर लिया। सोमवार सुबह जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दोनों नवजातों को चाइल्ड हेल्पलाइन के संरक्षण में चाइल्ड केयर सेंटर भेजा गया। सीडब्ल्यूसी कार्यालय से 50 मीटर दूर बच्चे होने के बावजूद मां उनसे मिलने नहीं पहुंची। इस पहलू ने पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जिला बाल संरक्षण इकाई सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (एसआईआर) तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में मां की परिस्थितियों का मूल्यांकन किया जाएगा। पारिवारिक माहौल और बच्चों के हितों पर भी विचार होगा। इसके बाद सीडब्ल्यूसी बच्चों की सुपुर्दगी पर अंतिम फैसला लेगी।
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चाइल्ड केयर के पालने में खिलखिला रहे भाई-बहन
जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दोनों जुड़वां बच्चे चाइल्ड केयर सेंटर पहुंच गए हैं। यहां उनकी देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है। समय पर दूध, दवाएं और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। बच्चों वहां पालने में मस्ती से झूल रहे हैं।चाइल्ड हेल्पलाइन प्रभारी तौसीफ वारसी ने बताया कि दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। फिलहाल उनकी किलकारियां चाइल्ड केयर सेंटर में गूंज रही हैं, जबकि उनके भविष्य का फैसला अब सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट और आदेश पर टिका है।
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जब बड़े होंगे दोनों...
भाई-बहन के रूप में जन्मे ये जुड़वा बच्चे अभी भले ही दुनिया की उलझनों से अनजान हों, लेकिन समय के साथ उनके मन में भी सवाल उठेंगे। वे जानना चाहेंगे कि जन्म देने वाली मां कौन थी, उनसे दूर क्यों हुई और फिर उन्हें वापस पाने की कोशिश क्यों की। शायद एक दिन वे अपनी कहानी के उन पन्नों को तलाशेंगे, जिनमें ममता, मजबूरी और इंतजार एक साथ दर्ज हैं। ऐसे में मां की यह पुकार सिर्फ बच्चों को पाने की कोशिश नहीं, बल्कि टूटे रिश्ते को फिर से जोड़ने की चाह भी है।