कन्नौज। लघु सिंचाई विभाग की नलकूप बोरिंग में की गईं मनमानी की पोल विभागीय मंत्री के सामने खोल दी गई। किसानों ने उत्पीड़न की लिखित शिकायतें कीं। इस पर मंत्री ने जांच कराकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष विवेक मिश्रा ने मंत्री को बताया कि जिले में लघु सिंचाई विभाग किसानों का आर्थिक दोहन करने में जुटा है। सत्ता परिवर्तन के बावजूद अभियंताओं की खाऊ-कमाऊ नीति नहीं बदली है। ज्यादातर बोरिंगें फेल हो रही हैं क्योंकि उनमें गुणवत्ता के अनुरूप सामान नहीं लग रहा है। सरकारी योजनाओं के तहत की जाने वाली बोरिंग के बदले में किसानों से सुविधा शुल्क वसूला जाता है। घटिया सामग्री डालने पर जो बोरिंगें फेल हो गईं उनके बदले में दूसरी बोरिंग भी किसान के खेत पर नहीं कराई जाती है। बोरिंग कराने में खर्च धनराशि भी किसान को वापस नहीं की जाती है। जिले के तमाम किसान बोरिंग फेल होने के कारण कभी ब्लाक तो कभी विकास भवन के चक्कर लगाते हैं, लेकिन जेई आज-कल में समस्या का समाधान करने का आश्वासन देकर टालमटोल करते हैं। झब्बू मिश्रा, नरेश यादव समेत कई अन्य किसानों ने शिकायत को सही करार देते हुए कहा कि विभागीय अभियंता किसानों पर जुल्म ढा रहे हैं। हजारों रुपये बरबाद होने के बावजूद किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। मंत्री ने लिखित में शिकायत लेकर अपने पास रखी और जांच कराकर बोरिंग के नाम पर खेल करने व किसानों से उगाही कर उन्हें परेशान करने वालों पर कार्रवाई की बात कही।
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विवादों से रहा है पुराना नाता
कन्नौज। जिले के लघु सिंचाई विभाग का विवादों से गहरा नाता रहा है। मनरेगा में अनियमितताएं उजागर होने पर दो मामलों में मुकदमा हो चुका है। अभियंता कानूनी चक्कर काट रहे हैं। वहीं एक बार फिर जाब कार्ड बनाने में गड़बड़ी को लेकर भी लघु सिंचाई विभाग के अभियंता का नाम सामने आया है। इतना सब होने के बावजूद किसानों को परेशान करने का सिलसिला थमा नहीं है। कन्नौज, उमर्दा, जलालाबाद, हसेरन, सौरिख, गुगरापुर समेत जिले के ब्लाकों में ही नहीं बल्कि विकास भवन में खुले जिला स्तर के लघु सिंचाई विभाग के दफ्तर में भी किसानों को चक्कर लगाते देखा जा सकता है।