27 साल से कांग्रेस का वनवास चल रहा है। कांग्रेस की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की मौत के बाद सहानुभूति की लहर में कांग्रेस ने 1985 में छिबरामऊ व कन्नौज की सीट जीती थी। इसके बाद से हाशिये पर गई कांग्रेस 2016 तक उबर नहीं सकी है। कांग्रेस 2017 में नये जोश के साथ चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है।
कन्नौज सदर से 1985 में कांग्रेस के बिहारी लाल दोहरे ने जीत हासिल की थी। इसी प्रकार छिबरामऊ सीट से 1985 में संतोष चतुर्वेदी को जीत मिली थी। वहीं, तिर्वा विधानसभा सीट (पूर्व में उमर्दा) से 1980 में कांग्रेस से योगेंद्र सिंह विजयी रहे थे। इस सीट पर कांग्रेस को 1985 की इंदिरा लहर का फायदा नहीं मिला।
यहां से एलकेडी पार्टी की राम नंदिनी वर्मा विजयी रहीं थी। कांग्रेस के योगेंद्र सिंह दूसरे स्थान पर 36957 वोटों के साथ रहे थे। फिलहाल 1989 से कांग्रेस यहां से जीत नहीं पाई है। वहीं, उमर्दा सीट जो वर्तमान में (तिर्वा) पर कांग्रेस 1985 से सत्ता से दूर है। कांग्रेस को टिकट वितरण में मशक्कत करनी पडे़गी।