यदि वन विभाग ने दावों के अनुसार काम किया और प्राकृतिक परिस्थितियों ने साथ दिया तो आने वाले वर्षों में कन्नौज शहर में इत्र के साथ-साथ चंदन की खुशबू भी फिजाओं में महकेगी। फिलहाल वन विभाग ने सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के सहयोग से नगर के सौंदर्यीकरण के सपने के तहत चंदन समेत विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगवाने की कार्ययोजना तैयार की है।
प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह के अनुसार इस सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए 1 करोड़ 58 लाख 61 हजार रुपये का खर्चा आएगा। इससे चंदन के पेड़ लगाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। कन्नौज में चंदन के प्रकार से संबंधित 16 छोटे-बड़े उद्योग हैं, लेकिन चंदन की लकड़ी की उपलब्धता न होने के कारण इस समय ये बंद चल रहे हैं। चंदन की लकड़ी में औषधीय गुण होते हैं। इसके अलावा चंदन की लकड़ी में नक्काशी का काम सफलतापूर्वक किया जाता है। चंदन की लकड़ी का वर्तमान मूल्य 6 से 7 हजार रुपया प्रति किलो है।
वन विभाग के अफसर के मुताबिक जिले में चंदन से जुड़े उद्योग को पुर्नजीवित करने के लिए चंदन की लकड़ी की जरूरत है। चंदन का वृक्ष मध्यम आकार का व कम क्षत्र वाला होता है। जनपद में 15 हजार चंदन के पेड़ तैयार करने की योजना है। इसके लिए शुरुआती दौर में 25 हजार थैली चंदन के पौध तैयार किए जाएंगे। ताकि शिफ्टिंग आदि के दौरान 2 साल बीतने के बाद कम से कम 15 हजार पौध सही सलामत रहें।
तिर्वा रेलवे क्रासिंग से पाल चौराहे तक दोनों तरफ दो पंक्तियों में 800, तिर्वा क्रासिंग से सर्किट हाउस तक 500, पुलिस लाइन से चौधरियापुर रोड किनारे 200, मकरंदनगर से विनोद दीक्षित चिकित्सालय तक 100, गोल कुंआ से यूपीटी तक 50, फूलमती मंदिर से कांशीराम कालोनी तक 200, गोल कुंआ से कटियार चौराहा बाईपास तक 100, कन्नौज सिटी रेलवे स्टेशन से रामपुर तक 100, यूपीटी क्रासिंग से जागरण पब्लिक स्कूल तक जाने वाले रोड पर 400 समेत कुल 2450 चंदन पेड़ रोडों के किनारे दोनों तरफ स्थापित कराए जाएंगे।
इसके अलावा इंटरकालेज, डिग्री कालेज, कलेक्ट्रेट, विकास भवन, तहसील, कचहरी समेत विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के परिसरों व राजकीय कालेजों के परिसरों में 1550 चंदन के पेड़ लगाए जाएंगे। ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक स्थलों के परिसर में भी चंदन के वृक्ष तैयार किए जाएंगे। ये वृक्ष उत्तर प्रदेश के बाहर के स्थानों से खरीदकर लाए जाएंगे। सभी पौधे 8 से 12 मीटर ऊंचाई के रोपित किए जाएंगे। विशिष्ट प्रजाति के टेबबुयां, कौर्रिजिया आदि चंदन के पेड़ों के साथ-साथ फाइकस बेंजामिना, पीपल, बरगद, पाकड़, नीम के पेड़ भी लगाए जाएंगे। इनके चारों तरफ लोहे के ट्री गार्ड लगाए जाएंगे।
एफएफडीसी की सहायता से किसानों को निर्धारित शुल्क लेकर चंदन के पेड़ मुहैया भी कराए जाएंगे। किसानों को पौध वितरण के समय गड्ढा खुदान, रोपण, संवर्धन, देखरेख आदि से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जिलाधिकारी को स्टीमेट भेज दिए गए हैं। चंदन का वृक्ष पारंपरिक अवस्था मे आंशिक रूट पैरासाइट है। इसलिए चंदन के बुआन के पूर्व थैलों में होस्ट पौधा तैयार किया जाएगा।
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धार्मिक स्थल भी चिह्नित किए
उन धार्मिक स्थलों को चिह्नित कर लिया गया है जहां चंदन के पेड़ लगेंगे। बाबा गौरीशंकर मंदिर, मकदूम जहानियां, बाबा हाजी शरीफ की दरगाह, गोवर्धनी देवी मंदिर जलालपुर पनवारा, चिंतामणि मंदिर, बालापीर का मकबरा में 50-50 वृक्ष, अन्नपूर्णा देवी मंदिर तिर्वा में 60 (कुल 360) चंदन के पेड़ लगाए जाएंगे। ये पौधे आयरन ट्री गार्ड में 6-6 मीटर की दूरी पर रोपित किए जाएंगे।
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सुरक्षित रखना किसी चुनौती से कम नहीं
भौगोलिक स्थितियों के अनुसार चंदन पेड़ तैयार करना बेहद टेढ़ीखीर है। हालांकि एफएफडीसी के वैज्ञानिक व डायरेक्ट शक्ति विनय शुक्ला कहते हैं कि सही तौर-तरीके हों तो यहां पर भी चंदन के पेड़ तैयार हो सकते हैं। निरंतर देखरेख की जरूरत होगी। वैसे चंदन पेड़ का कन्नौज से नाता तो सदियों पुराना है लेकिन पहली बार शहर में वृक्षारोपण की लिस्ट में चंदन के पेड़ शामिल किए गए हैं। जिला प्रशासन को चंदन पेड़ों को तैयार करने के साथ ही उनकी सुरक्षा पर भी खासा ध्यान देना पड़ेगा। चंदन के पेड़ सही सलामत रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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अब गेंद प्रशासन के पाले में पहुंची
वन विभाग के अनुसार शासन-प्रशासन के निर्देश पर उन्होंने तीन चरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर डीएम व सीडीओ को भेज दी है। अब आगे का निर्णय जिला प्रशासन को लेना है। वन विभाग ने अपनी तैयारियां कर ली हैं। यदि कार्ययोजना को मंजूरी मिली व बजट आवंटित हुआ तो वित्तीय वर्ष 2015-16 से ही चंदन पेड़ लगाने की योजना शुरू कर दी जाएगी।