कन्नौज/छिबरामऊ। इस बार अक्षय तृतीया के दिन ज्वैलरी की दुकानों पर जेवरों के खरीदारों की भीड़ न के बराबर रही। दुकानदारों का कहना था कि भीषण गर्मी और तपती दोपहरी व महंगाई के कारण इस बार सोने के जेवर खरीदने लोग नहीं पहुंचे।
मंगलवार को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया गया। इस दिन सोना खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है, ऐसी मान्यता है। भारतीय काल गणना के सिद्धांत के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इसी वजह से इस तिथि को सर्वसिद्ध माना जाता है। परंपरा के अनुसार सोना खरीदा जाता है। महंगाई और गर्मी की वजह से इस बार ज्वैलरी की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ कम रही। गमादेवी मंदिर के पुजारी पं. बनारसीदास शास्त्री ने बताया कि यह त्योहार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी तीसरे दिन मनाया जाता है। इस पर्व को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी। वेदव्यास और भगवान गणेश ने आज ही के दिन महाभारत को लिखना शुरू किया था। इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। ब्राह्मणों को दान करना फलदायी है। सोना खरीदना शुभ माना जाता है। अक्षय का मतलब सनातन और तृतीया का मतलब तीसरा होता है। इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण को जौ, सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित की जाती है। इस दिन गरीबों को शरबत, ठंडा दूध, चप्पल और छाता दान करना उत्तम माना जाता है।
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