कन्नौज। होटल व रेस्तरां आदि में कढ़ाई में बचे तेल का दोबारा इस्तेमाल करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। कढ़ाई में बचे तेल को नष्ट करना होगा। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए पूर्व में बनाए गए आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश एफडीए को दिए हैं।
जिला अभिहित अधिकारी सतीश कुमार शुक्ला ने बताया कि यह नियम 50 लीटर तेल रोजाना इस्तेमाल करने वालों पर लागू होगा। आमतौर पर बाजार की कोई तली हुई चीज खाने से पेट खराब होने के साथ ही अन्य परेशानी हो जाती है। इसके बावजूद लोग चाट, समोसा, ब्रेड पकोड़ा, पकौड़ी, खस्ता आदि बड़े शौक से खाते हैं। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और इसमें इस्तेमाल हो रहा तेल भी संदिग्ध होता है। ज्यादातर दुकानदार एक बार इस्तेमाल हुए तेल को बार-बार प्रयोग कर खाद्य सामग्री बनाते रहते हैं। जला तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। जारी आदेश के तहत, होटल, ढाबा और अन्य दुकानदारों को तेल से संबंधित रिकार्ड रखना होगा। इसमें कितना तेल खरीदा, कितना इस्तेमाल हुआ, साथ ही बचे और जले तेल का क्या हुआ, आदि विवरण शामिल होगा।
घट जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
फिजीशियन डा. वीके शुक्ला बताते हैं कि एक ही तेल के बार-बार इस्तेमाल से उसकी प्रकृति और गुण बदल जाते हैं। तेल का फैटी एसिड कंपोजिशन चेंज हो जाता है। कई हानिकारक तत्व तेल में शामिल हो जाते हैं। इसका असर रक्त कणिकाओं पर पड़ता है। व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। किडनी, लिवर आदि पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
कढ़ाई में बचे तेल का दोबारा किया इस्तेमाल तो लाइसेंस निरस्त
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिए निर्देश