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विश्व क्षय दिवस : शाम को बुखार और रात में पसीना आए तो डॉक्टर को दिखाएं

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। यदि 15 दिन से शाम को बुखार और रात में पसीना आ रहा है या दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। हो सकता है कि आप माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की चपेट में आ गए हों, जिससे टीबी (क्षय रोग) होता है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो घबराएं। नियमित दवा लेने से यह सही हो जाती है। बीच में दवा छोड़ने से बैक्टीरिया में मल्टी ड्रग रजिस्टेंश (एमडीआर) होने से उपचार जटिल हो जाता है।

24 मार्च यानी सोमवार को विश्व टीबी दिवस मनाया जाएगा। इसका मकसद टीबी रोग के बारे में लोगों को जागरूक करना और नियमित उपचार के प्रति सजग करना है ताकि इसको खत्म किया जा सके। मेडिकल कॉलेज के क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री बताते हैं कि टीबी का सही समय पर सही व नियमित उपचार जरूरी है। बीच-बीच में दवा छोड़ने से या फिर उपचार नहीं कराने से यह जानलेवा हो जाती है। टीबी का उपचार हर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर होता है।
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मेडिकल कॉलेज में झांसी, महोबा, जालौन, बांदा व ललितपुर के एमडीआर के काफी रोगी आते हैं, जिनकी हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे में इन रोगियों को भर्ती करके उपचार किया जाता है। वह बताते हैं कि जानकारी के अभाव की वजह से लोगों को पता ही नहीं चलता कि वह टीबी की चपेट में आ चुके हैं। जिसकी वजह से नाजुक हालात में पहुंच जाते हैं। सरकार का पूरा फोकस टीबी को खत्म करने पर है। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले रोगियों को लंबे समय तक चलने वाली महंगी दवाएं नि:शुल्क दी जाती है। वह बताते है कि टीबी का इलाज तब तक कराएं जब तक डॉक्टर बंद नहीं करें। अपने हिसाब से दवा बंद करके लोग अपना जीवन खतरे में डालते हैं।

लक्षण

- दो हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी रहना



- खांसी के समय बलगम या खून आना

- लंबे समय से हल्का बुखार बना रहना



- शाम को बुखार और रात में पसीना आना

बचाव के उपाय

- संक्रमित मरीज खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखें



- रोगी को जगह-जगह थूकने से रोका जाए

- रोगी के पोषण का ध्यान रखें, धूम्रपान बंद करें



- एक माह के अंदर बच्चे के बीसीजी टीका लगवाएं

आज से वितरित होगी नई दवा



विश्व क्षय रोग दिवस पर सोमवार को रोगियों को बी.पाल-एम (बीडाक्वेलिन, प्रीटोमैनिड, लिनेजोलिड, मॉक्सीफ्लोसिन) दवा दी जाएगी। अभी तक टीबी का उपचार नौ से 18 माह तक लगातार चलता है। इसके लिए रोगी की समय-समय पर जांचे होती थीं। मगर अब छह से नौ माह में टीबी पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

जिले से बढ़ रहे रोगी



जिले में टीबी के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. यूएन सिंह का कहना है कि स्क्रीनिंग बढ़ने की वजह से रोगियों का आंकड़ा बढ़ रहा है। यह टीबी को खत्म करने की दिशा में एक अच्छा संकेत है। विभाग के अनुसार वर्ष 2021 में 6540, 2022 में 6992, 2023 में 8626, 2024 में 9526 और एक जनवरी से 22 मार्च तक 2002 रोगी मिले हैं।

2024 में 103 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त



वर्ष 2023 में 36 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुईं। 2024 में 103 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई हैं। अच्छी बात यह है कि 12 ग्राम पंचायत दो वर्ष से टीबी मुक्त होने की लाइन में हैं। 29 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में इन ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा।
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वर्जन



टीबी का नियमित उपचार जरूरी है। बीच-बीच में दवा बंद करने से न सिर्फ उपचार जटिल होता है बल्कि जीवन पर भी संकट हो जाता है। अब इसके उपचार की नई दवा भी आ गई है, जिससे सोमवार से उपचार शुरू किया जाएगा। - डॉ. मधुर्मय शास्त्री, क्षय रोग विभागाध्यक्ष मेडिकल कॉलेज
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