झांसी। कोरोना काल में जब परिजनों की मदद के लिए अपने आगे नहीं आए तब दोस्तों ने मित्र धर्म निभाया। किसी ने कोरोना से जान गंवाने पर मित्र के परिजनों को कंधा दिया तो किसी ने रक्तदान कर जान बचाई। कोई तो कोविड अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए दवा, खाने का इंतजाम करता रहा। इस विपरीत परिस्थिति में दोस्तों ने एक-दूसरे की मदद कर रिश्तों की डोर को और मजबूत किया। पेश है एक रिपोर्ट...।
हरेंद्र के एक फोन पर रक्तदान करने पहुंच गए अनूप
नरसिंहराव टौरिया निवासी अनूप अग्रवाल और दतिया गेट बाहर के रहने वाले हरेंद्र साहू पिछले 30 सालों से अच्छे दोस्त हैं। साथ में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और फिर स्नातक की पढ़ाई की। साथ में उज्जैन में नौकरी भी की। चूंकि, हरेंद्र की नौकरी पहले लग गई थी, इसलिए शुरूआत में अनूप उन्हीं के घर पर रुके। कोरोना काल में हरेंद्र के चाचा को गैंगरीन हो जाने की वजह से ब्लड की जरूरत पड़ी। तब कोई भी रक्तदान करने के लिए घरों से निकल नहीं रहा था। ब्लड बैंक भी खाली पड़ी हुई थीं। तब अनूप हरेंद्र के एक फोन पर रक्तदान करने पहुंच गए। अनूप का कहना है कि बुरे वक्त में ही दोस्त एक-दूसरे के काम आते हैं।
अपने पीछे हटे तो आसाराम ने असद की महीनों की सेवा
चमनगंज के आसाराम और बंगलाघाट के असद में अच्छी दोस्ती है। दोनों एथलीट रहे हैं। ध्यानचंद स्टेडियम से शुरू हुई दोस्ती का सफर आज तक जारी है। रोजाना नारायण बाग पार्क में दोनों दौड़ने, नोटघाट पुल पर अंजनी माता मंदिर के पास बंदरों को केला खिलाने जाते हैं। कुछ समय पहले कोरोना से असद की हालत गंभीर हो गई। असद को कोई भी रिश्तेदार मदद के लिए आगे नहीं आया। तब आसाराम लगातार घर से अस्पताल दौड़ते रहे। खुद पैसे खर्च करके दावा, इंजेक्शन लाए। फोन पर भी लगातार हालचाल लेते रहे। जब असद घर पर आए और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो आसाराम ने व्यवस्था कराई।
इम्तियाज ने दीपेश की मां की अर्थी को दिया कंधा
दीपेश सक्सेना और इम्तियाज कलंदर दोनों आईटीआई के रहने वाले हैं। इसमें दीपेश का नया मकान बना हुआ है। मकान निर्माण के दौरान दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। फिर घर आना-जाना भी शुरू हो गया। कोरोना के दौरान दीपेश की मां का भी निधन हो गया। इसके बाद कई अपनों ने ही दूरी बना ली। इसकी जानकारी जब इम्तियाज को हुई तो वह तुरंत अर्थी को कंधा देने के लिए आगे आ गए। उन्होंने कुछ और लोगों को भी बुलाया। फिर घाट तक जाकर अंतिम संस्कार कराया। इस हादसे के बाद तो दोनों के बीच और गहरी दोस्ती हो गई। समय-समय पर दीपेश भी इम्तियाज की काफी मदद करते रहते हैं।