झांसी। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश पिछले एक महीने से जनता के लिए उपलब्ध नहीं हैं। तबादला आदेश के बाद वह कैंप कार्यालय से ही जरूरी विभागीय कार्य निपटा रहे हैं। न तो निरीक्षण के लिए निकलते हैं और न ही नियमित कार्यालय आते हैं। तबादले के बाद भी वह न तो रिलीव हुए हैं और न ही किसी दूसरे नगर आयुक्त की यहां तैनाती हुई है।
नगर आयुक्त अरुण प्रकाश का करीब एक माह पूर्व तबादला हो गया था, लेकिन उनके स्थान पर जिन्हें झांसी स्थानांतरित किया गया था, वह नहीं आए। इस कारण अरुण प्रकाश को रिलीव नहीं किया जा सका। इस बीच नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां रमजान के मौके पर झांसी के दौरे पर आए। यहां उनकी नगर आयुक्त से क्या गुफ्तगू हुई, यह किसी को नहीं पता। तभी से उनका तबादला रुकने के कयास लगाए जाने लगे, लेकिन कोई आदेश नहीं आया।
इधर नगर आयुक्त ने नगर निगम कार्यालय आना बंद कर दिया और विभागीय कार्य कैंप कार्यालय से करने लगे। बारिश में समस्याएं बढ़ी हैं। लोग नगर निगम में समस्याओं की पोटली लेकर आते और नगर आयुक्त से मुलाकात नहीं होने पर निराश होकर लौट जाते हैं। शासन का आदेश है कि प्रत्येक अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान के लिए अपने कार्यालय में सुबह दस बजे से बारह बजे तक बैठें, लेकिन अमूमन नगर आयुक्त उपलब्ध नहीं होते हैं। नगर आयुक्त कार्यालय भले ही नहीं आ रहे हों, लेकिन सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में वह बराबर हिस्सा ले रहे हैं।
मानता हूं कि प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पा रहा हूं। कैंप कार्यालय से जरूरी काम निपटा रहा हूं। दरअसल कार्यालय में बैठने पर नेता लोग घेर लेते हैं। काम प्रभावित होता है। तबादला रोकने का आश्वासन मिला है। शीघ्र ही निर्णय हो सकता है। इसके बाद कार्यालय में भी उपलब्ध रहूंगा और निरीक्षण पर भी निकलुंगा।
अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त
नगर आयुक्त के कार्यालय न आने की जानकारी मिली है। पता कराएंगे कि क्या वजह है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- के राममोहन राव
मंडलायुक्त
शासन ने महापौर के कई अधिकार नगर आयुक्त को दे दिए हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी अधिक बनती है। उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।
- किरण राजू बुकसेलर
महापौर