झांसी। कभी सर्द तो कभी गर्म मौसम होने से लोगों को बीमारियों ने घेर लिया है। घर-घर वायरल का कहर टूट रहा है। बच्चे से लेकर बड़े तक बुखार, खांसी, जुकाम, दस्त की चपेट में आ रहे हैं। यह बुखार रोगियों का शरीर पूरी तरह तोड़ दे रहा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में वायरल पीड़ितों की भीड़ है।
दिन की तेज गर्मी में लोग ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक सेवन कर लेते हैं। दिन-रात कूलर-एसी चलाते हैं। रेफ्रिजरेटर में रखा भोजन खाते हैं। इससे जुकाम-खांसी और वायरल बुखार हो रहा है। कई दिन तक बुखार रहने से निमोनिया की स्थिति बन जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। वायरल संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक भी पहुंचता है। इसलिए बेहतर होगा कि मरीज से दूरी बनाए रखें। जिला अस्पताल की ओपीडी में 150 में 45-50 मरीज तो मेडिकल कॉलेज में 300 में 80-85 मरीज वायरल के आ रहे हैं। वहीं, टायफाइड का मुख्य कारण दूषित खानपान है। खासकर दूषित जल सेवन करने से टायफाइड बुखार होता है। स्वस्थ रहना है तो बचाव के उपाय करने जरूरी हैं। बुखार होने पर चिकित्सक से परामर्श लेकर रक्त की जांच जरूर कराएं।
ये हैं लक्षण
- खांसी-जुकाम, तेज बुखार
- थकान, जोड़ों, सिर में दर्द
- मांसपेशियों, बदन में दर्द
- दस्त लगना
- त्वचा पर लाल रेशे
- आंखें लाल होना
टायफाइड के लक्षण
- 102 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार
- शरीर में अत्यधिक कमजोरी आना
- पेट दर्द, सिर दर्द, भूख कम लगना
- उल्टी लगना
बच्चों में वायरल के लक्षण
- गले में खराश और कंपकंपी
- दो सप्ताह तक डायरिया या खांसी
- बच्चा थका हुआ लगने लगे
- बच्चे को सांस लेने में कठिनाई
- त्वचा में रैशेज, आंखें लाल होना
ओपीडी में आधे मरीज तो वायरल के ही आ रहे हैं। इस कारण कभी सर्द तो कभी गर्म मौसम है। लोगों को भी गर्मी से आकर एकदम एसी या फिर ठंडा पीने से बचना चाहिए। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
पिछले कुछ दिनों में वायरल के मरीजों की तादाद बढ़ी है। परिवार में किसी एक में इसके लक्षण आते हैं तो दूसरे लोग भी चपेट में आ जा रहे हैं। इसलिए सावधानी बरतें। - डॉ. रजत जैन, फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज।
छोटे बच्चे वायरल बुखार, खांसी, जुकाम, दस्त का भी शिकार हो रहे हैं। बुखार ठीक होने में तीन से पांच दिन लग रहे हैं। इसलिए बच्चों का बचाव करें। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।