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वायरल, डेंगू रोगियों की भरमार, सीएचसी-पीएचसी खुद बीमार

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झांसी। जिले में डेंगू और वायरल के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ती जा रही है। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। दूसरी तरफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को देखने के लिए डॉक्टरों का जबरदस्त टोटा है। कई केंद्र तो ऐसे हैं, जहां डॉक्टर ही नहीं हैं। कई जगहों पर तो फिजीशियन नहीं है। मरीजों को इलाज के लिए 50-50 किलोमीटर चलकर शहर आना पड़ा रहा है।
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झांसी में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 88 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें से सीएचसी पर 45 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 43 डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, पीएचसी में 33 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें 17 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 16 पद रिक्त हैं। हाल ये है कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो एक भी चिकित्सक नहीं हैं। इन हालातों में खासकर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं। इन दिनों वायरल और डेंगू तेजी से फैला हुआ है। इन्हें देखने के लिए कई इकाइयों में फिजीशियन नहीं है। मरीज कराहते हुए इलाज कराने के लिए 50-50 किलोमीटर दूर शहर के अस्पतालों तक दौड़ लगा रहे हैं।
यहां एक भी डॉक्टर नहीं
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धमना, न्यू पीएचसी मुडई, न्यू पीएचसी पुलिया, न्यू पीएचसी शाहजहांपुर, न्यू पीएचसी पूछ, न्यू पीएचसी लोहागढ़, न्यू पीएचसी मारकुंआ, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटैरा, न्यू पीएचसी अक्सेव में एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में यहां पीएचसी खोलने का कोई लाभ ही आमजन को नहीं मिल रहा है।
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यहां चिकित्सकों की काफी कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरुआसागर छह में से पांच, सीएचसी मोंठ में आठ में से तीन, समथर में छह में चार, सीएचसी बामौर में आठ में पांच, सीएचसी गरौठा में छह में पांच, सीएचसी बंगरा में आठ में से चार, सीएचसी रानीपुर में छह में पांच, सीएचसी मऊरानीपुर में आठ में चार डॉक्टर नहीं हैं।
ग्रामीण स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला के तहत भी चिकित्सा इकाइयों पर मरीजों की नि:शुल्क जांच और दवाएं दी जा रही हैं। डॉक्टरों की भी लगातार तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. विनोद कुमार यादव, जेडी।
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