झांसी। बेसिक शिक्षा परिषद के महानगर में 17 विद्यालय किराए के भवनों में संचालित किए जा रहे थे। इन भवनों की हालत खस्ता होने पर यहां चलने वाले विद्यालयों को नजदीक के परिषदीय विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया था। ऐसे में एक-एक भवनों में दो-दो विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को पठन-पाठन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर में कुल 79 विद्यालय हैं जिनका संचालन बेसिक शिक्षा परिषद के माध्यम से किया जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इनमें सात विद्यालय पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जबकि 21 विद्यालयों का संचालन किराए के भवन में हो रहा है। किराए के भवन में चल रहे विद्यालयों में से 17 की स्थिति अब ढहे, तब ढहे जैसी हो चुकी है। इन्हें गिराने के लिए शासनादेश मिल चुका है। इससे यहां के बच्चों को नजदीक के स्कूलों से अटैच कर दिया है। कुछ बच्चे कोरोना के भय से तो कुछ दूसरे स्कूलों में जाने से कतरा रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को दूसरे स्कूलों में नहीं भेजना चाहते, जिससे बच्चों की उपस्थिति काफी कम हो गई है। स्थिति के अनुसार भवनों को गिराने के लिए बजट की राशि 50 हजार से पांच लाख तक आंवटित की गई है। इसके लिए कार्य योजना तैयार कर शासन को भेज दी गई है। वहीं शासन ने स्कूलों के निर्माण के लिए जमीन चिह्नित का निर्देश दिया है।
किसी भी विद्यालय के लिए जमीन नहीं हो सकी है चिह्नित
शासनादेश के बाद जमीन चिह्नित करने के लिए खंडशिक्षाधिकारियों को एक वर्ष से निर्देश मिला है लेकिन अभी तक एक भी विद्यालय के लिए जमीन नहीं चिह्नित की जा सकी है।
जर्जर स्कूलों के भवनों को गिराने के लिए शासन से निर्देश मिल चुका है। शीघ्र ही उन्हें गिरा दिया जाएगा। परिषदीय विद्यालयों को ढहाकर भवन तो उसी जगह बनेंगे लेकिन किराए के भवनों को लेकर संशय है। जमीन चिह्नित हो जाने पर नए विद्यालय भवन चिह्नित स्थानों पर ही बनेंगे। हालांकि कि अभी तक किसी भी विद्यालय निर्माण के लिए जमीनों को चिह्नित नहीं किया जा सका है।
- वेद राम
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी