झांसी। तीसरी लाइन डलने व बढ़ते ट्रैफिक के साथ छोटे स्टेशनों पर तैनात स्टेशन मास्टरों के लिए काम करना मुश्किल भरा होता जा रहा है। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने स्टेशन मास्टरों की इस समस्या को देखते हुए स्टेशन मास्टर के साथ पैनल ऑपरेटर लगाने के निर्देश दिए थे, मगर कुछ समय बाद ही यह व्यवस्था फेल हो गई। इस कारण सभी काम स्टेशन मास्टर को करने पड़ रहे हैं, जो सीधा संरक्षा से खिलवाड़ है।
रेलवे बोर्ड ने 85 फीसदी ट्रैफिक वाले स्टेशन मास्टरों पर बढ़ते काम के लोड के कारण एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रशिक्षित कर बतौर पैनल ऑपरेटर तैनात करने के आदेश दिए थे, ताकि उनका कुछ काम हल्का हो सके। शुरूआत में तो बंद हो रही केबिनों पर तैनात स्वीच मैन स्टाफ को स्टेशन मास्टरों के साथ तैनात कर दिया गया। मगर, बाद में स्वीच मैन या तो गार्ड बन गए या सेवानिवृत्त हो गए। वर्तमान में किसी भी स्टेशन पर पैनल ऑपरेटर नहीं है। जबकि पिछले कुछ सालों में स्टेशन मास्टरों के पास डेढ़ गुना से अधिक काम बढ़ गया है।
रेल मंडल में दिल्ली-मुंबई मुख्य ट्रैक पर प्रतिदिन औसत 140 सवारी और मालगाड़ियां गुजरती हैं। मंडल के मुख्य ट्रैक पर बबीना, तालबेहट, धौर्रा, जाखलौन, बसई, खजराहा, बिजौली, दतिया, डबरा, सोनागिर, आंतरी, अनंतपेठ समेत करीब 40 से अधिक स्टेशन हैं, जिन पर तीन स्टेशन मास्टर तैनात हैं। जो रोस्टर के हिसाब से 24 घंटे में आठ- आठ घंटे के अंतराल पर ड्यूटी करते हैं।
ये करने पड़ते हैं काम
- हर बार ट्रेन गुजरने पर हरी झंडी दिखाना
- पूरी गाड़ी को गुजरते चेक करना
- ट्रेन गुजरने से पहले सिगनल और आसपास के क्रासिंग गेट बंद होना सुनिश्चित करना।
- गेटमैन और दूसरे स्टेशनों मास्टरों से समन्वय बनाकर रखना।
- बुकिंग कर्मचारी की तैनाती न होने पर टिकट बांटना।
- स्टेशन का रखरखाव और अन्य जरूरी दस्तावेजों को तैयार करना।
- मंडल कंट्रोल रूम से हर समय जुड़ा रहना।