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ईसागढ़ वालों ने ठाना और कर दिखाया...इस गांव के हर शख्स को लग गया टीका

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झांसी। जिले भर में कहर बनकर टूटी कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ागांव ब्लॉक के ईसागढ़ गांव में भी कई परिवार उजाड़ दिए। खौफ का आलम ये था कि लोगों ने घरों से बेवजह बाहर निकलना छोड़ दिया था। फिर जैसे ही गांव के लोगों को कोरोना का टीका लगवाने का मौका मिला, वो पीछे नहीं रहे। बिना किसी डर, भ्रम के ग्रामीणों ने वैक्सीन लगवाई। अब इस गांव में भी शत-प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है।
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अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में पता चला कि शहर के नजदीक होने की वजह से ईसागढ़ गांव के लोग काफी जागरूक हैं। यहां लोगों में वैक्सीन को लेकर कोई भी भ्रम या आशंका नहीं थी। दूसरी लहर में ग्रामीणों का कोरोना संक्रमित होने का सिलसिला लगातार जारी रहा। इसी बीच गांव के पांच-छह लोगों की कोरोना से जान भी चली गई। 55 परिवार वाले इस छोटे गांव पर ये मौतें बहुत भारी पड़ीं। पूरे गांव में दहशत का माहौल हो गया। लोगों ने एक-दूसरे से बात करनी बंद कर दी। बेवजह घरों से बाहर निकलना छोड़ दिया। गांव के 45 से अधिक आयु के लोगों ने तो टीका लगवाना दूसरी लहर के दौरान ही शुरू कर दिया था मगर 18 से अधिक उम्र वालों को जैसे ही मौका दिया गया, वो भी झटपट टीका लगवाने लगे। शुक्रवार को जिले में सभी लोगों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वो कोविड से एक भी मौत गांव में नहीं देखना चाहते हैं, इसी वजह से सभी लोग एक दूसरे को टीका लगवाने के लिए प्रेरित भी करते रहे।
सबसे पहले 13 किलोमीटर दूर जाकर लगवाया टीका
जंगबहादुर (55) गांव के पहले सदस्य थे, जिन्होंने वैक्सीन लगवाई। उन्होंने इसके लिए 13 किलोमीटर दूर तक का सफर भी किया। जंगबहादुर ने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग कराने के बाद वो जिला अस्पताल पहुंचे, यहां पर टीका लगवाया। गांव आते ही दूसरे लोगों को भी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, गांव में टीकाकरण शुरू हुआ तो केंद्र पर सबसे पहले विजय कुमार पहुंचे। इसके बाद परिजनों और आसपास के लोगों भी टीका लगवाने के लिए केंद्र लेकर गए। 21 वर्षीय रिषभ ने बताया कि वो गांव में संक्रमित होने वाला सबसे पहला सदस्य था। ऐसे में उसने भी मौका मिलते ही वैक्सीन की पहली डोज लगवा ली।
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मजदूरों ने गांव आना तक छोड़ दिया था
गांव वासियों ने बताया कि कोरोना के कहर के बीच एक के बाद एक मौत होने की वजह से निर्माण कार्य ठप पड़ गए थे, क्योंकि कोई भी मजदूर काम करने के लिए गांव आने को तैयार ही नहीं था। ऐसे में डेढ़-दो महीने तक गांव में निर्माण कार्य चालू नहीं हो सके। जब दूसरी लहर थमी, तब जाकर श्रमिकों ने गांव आना शुरू किया। अब वहां पर निर्माण से जुड़े कार्य चल रहे हैं।
एक नजर में गांव
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परिवार: 55
आबादी: 222
वैक्सीन लगी: 156
18 से 44 उम्र वाले: 49
45 से अधिक उम्र वाले: 107
महिलाओं का लगा टीका: 68
पुरुषों का लगा टीका: 88
ये बोले ग्रामीण
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खुद तो टीका लगवाया ही है, साथ ही अपनी एक बहू को भी केंद्र वैक्सीन लगवाने ले गई थी। जबकि, दूसरी बहू ने घर से 11 किलोमीटर दूर आयुर्वेदिक कॉलेज आकर वैक्सीन लगवाई। - जोशीना।
मैंने, पति और दोनों बच्चों सभी ने वैक्सीन लगवा ली है। पूरे परिवार प्रतिरक्षित हो जाने की वजह से अब कोरोना की तीसरी लहर से डर नहीं है। हालांकि, सतर्कता जरूर बरत रहे हैं। - अमदा।
कोरोना से लड़ना है तो वैक्सीन लगवानी जरूरी है। इसी सोच के साथ जैसे ही हमें टीका लगवाने का मौका मिला तो पीछे नहीं हटे। दूसरे लोगों को भी टीका लगवाने को जागरूक किया। - अनिल।
कोरोना की दूसरी लहर ने गांव में बहुत कहर बरपाया है। इसे भुलाया नहीं जा सकता। पांच-छह लोगों की संक्रमण से मौत भी हुई है। इसीलिए पूरे गांव ने वैक्सीन लगवा ली है। - स्टेनली।
गांव में टीकाकरण के लिए टीम आई थी। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने भी कोरोना की वैक्सीन लगवाने को लेकर जागरूक किया। इसी वजह से सभी पात्रों ने मौका मिलते ही टीका लगवाया। - मानकुंवर।
एक महीने हो चुके हैं, वैक्सीन लगवाए हुए। अब तक इंतजार है कि दूसरी वैक्सीन का समय जल्दी से आ जाए। दोनों वैक्सीन लग जाएगी तो फिर तीसरी लहर की चिंता खत्म हो जाएगी। - मंजू।
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