परिजन इन बातों का रखें ध्यान
- निगाह रखें कि बच्चा मोबाइल पर पढ़ाई कर रहा या गेम खेल रहा
- गेम का लती हो गया तो उसका ध्यान दूसरी तरफ लगाएं
- बच्चों को पीटे नहीं, उन्हें समझाएं कि ये लत बीमारी बन चुकी है
- बच्चा बहुत ज्यादा लती हो जाए, बात न सुने तो इलाज कराएं
ये भी मामले सामने आए
केस-1
गेम खेलने से रोका तो कलाई काट लूंगा
परिजनों द्वारा मोबाइल गेम खेलने से रोकने पर बड़ाबाजार निवासी एक बच्चे ने कलाई काटने की धमकी दे दी। वह दिनभर खुद को कमरे में कैद रखता था। किसी तरह परिजन उसे जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक के पास लेकर आए। काउंसलिंग और दवाएं देने के बाद कुछ सुधार हुआ है।
केस-2
नस काट चुका है, अब मां-बाप को पीटने भी लगा
शहर के एक किशोर मोबाइल गेम खेलने से रोके जाने पर नस काट चुका है। अब वह मां-बाप और छोटे भाई के साथ मारपीट भी करता है। उसकी उम्र सिर्फ 15 साल है। हाल ही में मनोचिकित्सक ने उसकी काउंसलिंग की। वह कहने लगा कि मोबाइल गेम खेलने को नहीं मिला तो जिंदा नहीं रह पाएगा।
केस-3
इंटरनेट पैक नहीं डलवाया तो घर छोड़कर चला गया
झांसी का एक किशोर सिर्फ इस बात पर घर छोड़कर चला गया कि पिता ने उसके मोबाइल फोन पर इंटरनेट पैक नहीं डलवाया। परिजन कहते थे कि परीक्षा के दौरान पढ़ाई करो। मगर वो रात भर मोबाइल गेम खेलता रहता था। बाद में पुलिस की मदद से उसे बरामद किया जा सका। अभी उसका इलाज चल रहा है।