झांसी। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाते-पढ़ाते 8 शिक्षक 12 कॉलेजों के मालिक बन गए। इसमें बीयू के ही पांच से छह शिक्षकों ने अपने परिजनों या फिर पार्टनरशिप में कॉलेज खोल रखे हैं। ऐसा भी नहीं है कि किसी को इसकी भनक न हो। शिकायत मिलने के बावजूद कॉलेजों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। बीयू अफसरों से मिलीभगत करके ये शिक्षक अपने कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनवाते हैं।
बीयू प्रशासन नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए जिन शिक्षकों को जिम्मेदारियां देता हैं, उनमें कई तो खुद अप्रत्यक्ष रूप से कॉलेज संचालक होते हैं। बताया गया कि बीयू के शिक्षकों ने अपने परिजनों के नाम से शिवपुरी मार्ग, ललितपुर मार्ग, जालौन आदि इलाकों में कॉलेज खोल रखा है। इसके अलावा कॉलेजों के शिक्षक भी रिश्तेदारों के नाम पर ललितपुर, बांदा, चित्रकूट समेत कई जिलों में कॉलेज संचालित कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक बीयू इन शिक्षकों को ही मूल्यांकन, गोपनीय और परीक्षा के कामों में लगा देता है। जिन शिक्षकों का खुद ही कॉलेज चल रहा है, उनसे भला क्या उम्मीद की जाएगी कि वो किसी महाविद्यालय में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करेंगे? ऐसे में ये शिक्षक अपने साथियों को भी कोई खामी मिलने पर कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनाते हैं। इससे कॉलेज संचालकों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। इसी की आड़ में धड़ल्ले से नकल का खेल चलता है। खास बात ये है कि इन शिक्षकों को बीयू अधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त है। सब कुछ जानते हुए भी बीयू के अधिकारी इन शिक्षकों से काम लेते हैं। वहीं, इस मामले में कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय का कहना है कि ये मामला गंभीर है। पता कराया जाएगा कि किन-किन शिक्षकों के परिजनों के कॉलेज हैं। उनसे मूल्यांकन, परीक्षा, गोपनीय आदि कार्य नहीं लिया जाएगा।
एक ही शिक्षक के पांच से छह कॉलेज
डिग्री कॉलेज में पढ़ाते-पढ़ाते एक ही शिक्षक ने पांच से छह महाविद्यालय खोल लिए। एक ही नहीं शिक्षक के कई जनपदों में महाविद्यालय है।
परीक्षा विभाग में बैठे हैं घाघ कर्मचारी
बीयू के परीक्षा विभाग में भी काफी समय से घाघ कर्मचारी बैठे हुए हैं। आए दिन इन कर्मचारियों पर आरोप लगते रहते हैं। फिर भी बीयू प्रशासन इतने गोपनीय विभागों की जिम्मेदारी भी विवादित कर्मचारियों को दिए हुए हैं।
कठपुतली बनकर रह गए अधिकारी
बीयू में इस समय माहौल बेहद खराब चल रहा है। हाल ये है कि बड़े से लेकर छोटे अधिकारी तक कुछ शिक्षकों, कर्मचारियों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गए हैं। दिन भर शिक्षक, कर्मचारी अधिकारियों के कमरों में बैठे रहते हैं और अपने हिसाब से फैसले कराते रहते हैं। अधिकारी भी अपने चहेतों के खिलाफ कुछ नहीं सुनना चाहते। इस कारण बीयू प्रशासन इस साल नकल रोकने में नाकाम साबित हो गया।