बुंदेलखंड से भागकर मुंबई पहुंचा सैयद इस्तयाक बन गया फिल्मी दुनिया का सूरमा भोपाली
झांसी। शोले के सूरमा भोपाली जगदीप अब इस दुनिया में नहीं रहे, पर यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि जगदीप का जन्म बुंदेलखंड के दतिया शहर में हुआ था। दतिया शहर के गंज राजगढ़ मार्ग पर स्थित राव बाग जिसे अब रामजी वाटिका क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, इसी मोहल्ले में सैयद यावर हुसैन जाफरी के घर 1939 में दो बेटियों के बाद तीसरी संतान के रूप में बेटे का जन्म हुआ। नाम रखा गया सैयद इस्तयाक अहमद जाफरी। जगदीप के पिता नगरपालिका में वकील थे और बेटे को भी वकील बनाना चाहते थे। पर, बचपन से ही नटखट जगदीप वकील तो नहीं बने पर चौदह साल की उम्र में घर से भागकर मुंबई पहुंचकर सूरमा भोपाली जरूर बन गए।
जगदीप के दतिया से मुंबई पहुंचने की भी एक अलग कहानी है। जगदीप की बड़ी बहिन मुंबई में ब्याही थी तथा उनके जीजाजी महमूद अली यहां फिल्म निर्माताओं को एक्ट्रा कलाकार उपलब्ध कराने का काम ठेका पर करते थे। चौदह साल के सैयद इस्तयाक अहमद जाफरी (जगदीप) सन 1954 में एक दिन घर से भागकर अपनी बड़ी बहिन के पास मुंबई पहुंच गए। यहां पर अपने जीजा महमूद अली के साथ इनका फिल्म स्टूडियो में आना जाना हो गया। इसी दौरान बीआर चौपड़ा फिल्म अफसाना बना रहे थे, उन्हें बालकलाकार की जरूरत थी, महमूद अली ने प्रस्ताव रखा और बीआर चौपड़ा ने स्वीकार कर लिया और उसी दिन से सैयद इस्तयाक अहमद जाफरी क नाम जगदीप हो गया। इसके बाद दर्जनों फिल्में आई जिन्होंने जगदीप को एक बड़े हास्य कलाकार के रूप में स्थापित कर दिया। दतिया में जगदीप के पड़ोसी कल्लू घोषी बताते हैं कि एक दो बार जगदीप दतिया आए भी, पर अंतिम समय में उन्होंने कई बार अपनी जन्मभूमि पर आने की इच्छा जताई पर यह पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि जगदीप के पिता सैयद यावर हुसैन जाफरी जो कि नगरपालिका के वकील थे, उन्होंने सेवा निवृत्त होने के बाद दतिया किला चौक पर काफी दिनों तक अपनी दुकान भी चलाई, जगदीप के कई बार कहने के बाद भी वह मुंबई नहीं गए। दतिया निवासी रवि ठाकुर बताते हैं कि जगदीप के दूर के खानदानी अब भी दतिया में रहते हैं उनका पैतृक घर भी है। दतिया अनेक संगठनों ने जगदीप के निधन पर शोक जताया है।