झांसी। सरकारी भवनों पर बकाया करीब 11 करोड़ का हाउसटैक्स वसूलने में निगम अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। काफी कोशिश के बाद भी निगम प्रशासन महज पांच संस्थानों से सिर्फ 10 लाख ही बकाया वसूल सका। वहीं, शैक्षिक संस्थानों ने हाउसटैक्स जमा करने से हाथ खड़े कर दिए। व्यवसायिक बकायेदारों से भी रकम नहीं वसूल हो पा रही है।
राज्य वित्त आयोग से नगर निगम को मिलने वाली वित्तीय मदद में पिछले तीन माह से भारी-भरकम कटौती हो रही है। इसके चलते निगम की माली हालत खस्ता होती जा रही। अब निगम प्रशासन टैक्स वसूली पर जोर दे रहा लेकिन बड़े बकायेदार बकाया चुकाने को राजी नहीं हो रहे। बड़े बकायेदारों में सर्वाधिक संख्या सरकारी इमारतों की ही है लेकिन सरकारी महकमों से ही वसूलने में निगम अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। निगम सीमा के भीतर 58 सरकारी भवनों पर कुल 11,47,69,540 रुपये बकाया है। पिछले माह नगर आयुक्त ने टीम बनाकर वसूली के निर्देश दिए। टीम ने वसूली शुरू की लेकिन अभी तक महज पांच संस्थानों से ही टैक्स वसूला जा सका। टैक्स चुकाने वालों में मंडी परिषद (8 लाख), ग्रीनलैंड (2.86 लाख) महिला पॉलीटेक्निक (1.50 लाख) एवं पैरामेडिकल कॉलेज शामिल हैं, जबकि करोड़ों का बकाये वाले संस्थान निगम के नोटिस का जवाब भी नहीं दे रहे हैं।
सबसे बड़े बकायेदारों में अधिकांश बड़े शैक्षिक संस्थान हैं। इनमें बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रोद्यौगिकी संस्थान (6.03 करोड़), महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज (1,10,20,414 रुपये), बीएसए (9,95,610 रुपये), डीआईओएस (16,79,160 रुपये) पर टैक्स बकाया है। वहीं, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी धीरेंद्र मोहन कटियार का कहना है कि बड़े बकाएदार विभागों के पास नियमित कर्मचारियों को भेजा जा रहा है। कुछ मामले कोर्ट में हैं। इनको भी जल्द निस्तारित कराने की कोशिश की जाएगी।
टैक्स चुकाने को राजी नहीं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पर नगर निगम का करीब चार करोड़ रुपया हाउसटैक्स बकाया है लेकिन विश्वविद्यालय यह टैक्स चुकाने को राजी नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शैक्षिक संस्थान होने के नाते नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा 177 बी के तहत उनको छूट मिलनी चाहिए जबकि निगम अफसरों का कहना है यह छूट सिर्फ इंटरमीडिएट स्तर कॉलेजों तक ही सीमित है। ऐसे में हर साल निगम प्रशासन की ओर से डिमांड भेजी जाती है लेकिन, विश्वविद्यालय कोई भुगतान नहीं करता। इसी तरह बीआईईटी के ऊपर भी भारी बकाया है लेकिन बीआईईटी भी निगम को भुगतान नहीं कर रहा है।
कर्मचारियों की कमी के चलते जोर नहीं पकड़ रहा अभियान
नगर आयुक्त ने टीम बनाकर वसूली करने के निर्देश दिए लेकिन, टीम में शामिल करने के लिए कर विभाग में कर्मचारी ही नहीं हैं। निगम सीमा के भीतर करीब 1.25 लाख भवन हैं लेकिन, इनके लिए महज तीन टैक्स इंस्पेक्टर, दो राजस्व निरीक्षक एवं एक दर्जन कर संग्रहकर्ता ही तैनात हैं। इन कर्मियों के पास रोजाना के काम लंबित रहते हैं कि विश्ेाष अभियान शुरू नहीं हो पाते। अधिक हाउसटैक्स की शिकायत पर जांच का जिम्मा भी इनके जिम्मे होता है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी धीरेंद्र मोहन कटियार का कहना है कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। इस वजह से भी वसूली प्रभावित हो रही है।