झांसी। देश की आजादी की लड़ाई में झांसी के क्रांतिकारियों का भी अहम योगदान है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक की कर्म भूमि झांसी रही है। झांसी के क्रांतिवीरों में एक नाम लाडली प्रसाद श्रीवास्तव का है। जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की गौरव गाथा के माध्यम से आम नागरिकों को देश की आजादी के लिए चल रही लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। वह भी कई बार जेल गए।
महानगर के गुदरी डरू भौडेला निवासी लाली प्रसाद श्रीवास्तव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। सन 1930 से लेकर 47 तक हुए स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में हिस्सा लिया था। महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन मैं वह जेल भी गए। उन्हें नाटकों के मंचन में बड़ी रुचि थी। झांसी की रानी नाटक को लिखा और उसका जगह-जगह मंचन कर लोगों को आजादी के आंदोलन में शामिल होने के लिए जागृत किया। इनकी यही राष्ट्र सेवा को ध्यान में रखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, झांसी के पहले सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर द्वारा सम्मानित भी किया गया।