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साफ्टवेयर ने रोकी नक्शों की चाल

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साफ्टवेयर ने रोकी नक्शों की चाल
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झांसी। जेडीए में ऑनलाइन नक्शा पास करवाने के लिए ऑन लाइन बिल्डिंग अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएस) को लागू किया गया था। यह अब भवन स्वामी व आर्किटेक्ट्स के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ऑनलाइन आवेदन करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते पिछले एक माह में एक भी मानचित्र पास नहीं हो सका है। हालांकि, नक्शा पास करने वाले को छह रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से अतिरिक्त शुल्क भी अदा करना पड़ रहा है।
झांसी विकास प्राधिकरण में ऑनलाइन नक्शा प्रणाली के लागू होते ही महज 48 घंटों के भीतर ही मानचित्र को पास करने का दावा किया गया था। जेडीए की वेबसाइट पर फार्म भरने के साथ ही जरूरी कागजातों को अपलोड करने, निर्धारित शुल्क भी अदा करने का नियम है। इसके लिए प्राधिकरण के शुल्क के अलावा मानचित्र की जांच करने वाली कंपनी को भी छह रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से अदा कराना होता है। जो भवन स्वामी को अतिरिक्त देना पड़ता है। प्री-डीसीआर साफ्टवेयर जमीन के लेआउट प्लान व नक्शे का मिलान करता है।
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खामी होने पर सुधार के लिए समय दिया जाता है। इसके लिए मोबाइल पर मेसेज भेजने की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन साफ्टवेयर की प्रोसेसिंग अलग होने व समय भी अधिक होने के साथ ही नार्मल साफ्टवेयर पर नहीं चल रहा है। जिसके चलते मानचित्र अपलोड नहीं हो पा रहा है।
इस नई व्यवस्था को एक माह पहले ही लागू किया गया था। लेकिन लगातार कंपनी के साफ्टवेयर में आ रही खराबी का खमियाजा भवन स्वामियों के अलावा आर्किटेक्ट्स को भी भुगतना पड़ रहा है। इस नई तकनीक के कारण एक माह मेें एक भी मानचित्र को पास नहीं किया गया है।
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इस संबंध में जेडीए उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि साफ्टवेयर में आ रही कमी के चलते 25 व 26 नवंबर को प्रमुख सचिव आवास व शहरी विकास के साथ कार्यशाला का आयोजन है। जल्द ही सॉफ्टवेर की कमी को दूर किया जाएगा।
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