झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की सभी जांचें ठप हैं। डॉक्टर भी मौके का फायदा उठाकर चुनिंदा रेडियोलॉजी सेंटरों पर मरीजों को भेज रहे हैं। सेंटरों के संचालक मरीजों ने मनमाफिक शुल्क वसूलकर मोटी कमाई कर रहे हैं। डॉक्टरों को भी इसमें कथित तौर पर हिस्सा मिल रहा है। मरीज सवाल उठा रहे हैं कि लाखों की कमाई का सवाल है, भला मशीनें कैसे चलेंगी? हालांकि, कॉलेज प्रशासन जानबूझकर मशीनें खराब होने की बात से इंकार कर रहा है।
मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह बदहाल है। लगातार मशीनें खराब होने से कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। डिजिटल एक्सरे मशीन 25 जुलाई से खराब पड़ी हुई थी। ये मशीन पिछले 11 महीने में लगभग 130 दिन खराब रही। वहीं, एमआरआई 26 सितंबर से अब तक खराब चल रही है। ये मशीन पूरे साल में लगभग 80 दिन खराब रही। इसके अलावा सीटी स्कैन सात नवंबर से खराब पड़ी है। यह जांच लगभग 50 दिन ठप रही। जांचों के औसत निकालें तो मरीज लगभग एक करोड़ 22 लाख 70 हजार रुपये की जांचें निजी केंद्रों से करा चुके हैं।
मेडिकल कॉलेज के आसपास कई रेडियोलॉजी सेंटर खुले हैं, जिनमें सीटी, एमआरआई और डिजिटल एक्सरे की सुविधा है। इनमें से कई सेंटरों पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की सेटिंग है। सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर मरीजों को अपने-अपने या सेटिंग वाले सेंटरों पर जांच के लिए रेफर कर रहे हैं। इससे संचालकों की मनमाफिक कमाई हो रही है, वहीं डॉक्टरों को भी मोटा कमीशन मिल रहा है। मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीज भी कह रहे हैं कि जांचों से कई डॉक्टरों को कमीशन के तौर पर मोटी रकम मिलती है, ऐसे में रेडियोलॉजी विभाग की मशीनें भला कैसे चलेंगी। कुछ दिन मशीन चलती है, फिर खराब कर दी जाती है।
प्राचार्य ने डॉक्टरों को किया तलब
जांच मशीनें लगातार खराब होने के मामले में प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक ने बृहस्पतिवार को रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों को तलब किया। प्राचार्य ने सवाल किया कि बार-बार मशीनें क्यों खराब हो रही हैं। क्या मशीनों का रखरखाव सही से नहीं हो रहा है? इस बार डॉक्टरों ने कहा कि सीटी और एमआरआई मशीनें 12-12 साल पुरानी हो चुकी हैं। बार-बार नई मशीन खरीदने के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी रेडियोलॉजी सेंटरों पर रेफर करने की बात संज्ञान में नहीं है। वैसे ऐसा होने की संभावना बहुत कम है। यदि कोई शिकायत आती है तो कॉलेज प्रशासन जांच कराकर कार्रवाई करेगा। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।
ये बोले मरीज
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बेटे प्रशांत को कमर में समस्या होने पर हड्डी रोग विभाग में डॉक्टर को दिखाने आया था। डॉक्टर ने पहले डिजिटल एक्सरे और फिर एमआरआई कराने को कहा। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई और डिजिटल एक्सरे दोनों मशीनें खराब थीं। एमआरआई में पांच हजार और डिजिटल एक्सरे में 400 रुपये खर्च हो गए। मशीन खराब हो रही है या जानबूझकर की जा रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। - बृजभान, भोजला।
सौ रुपये का किराया खर्च करके खुद को और बेटे को मेडिकल कॉलेज में दिखाने आया हूं। स्लिप डिस्क की समस्या होने पर डॉक्टर ने डिजिटल एक्सरे लिखा है। बच्चे को भी हाथ में समस्या है। डॉक्टर ने दोनों को डिजिटल एक्सरे कराने के लिए कहा है। मेडिकल कॉलेज में कोई भी जांचें नहीं हो रही हैं। मशीनें जानबूझकर खराब की जाती हैं, ताकि डॉक्टरों व अन्य लोगों को फायदा हो सके। - अशोक कुमार, मोंठ।