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बीज ग्राम योजना : अनुदान कम होने से रुचि नहीं ले रहे किसान

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झांसी। उन्नतशील बीज तैयार करने के लिए संचालित बीज ग्राम योजना के अंतर्गत किसानाें को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनुदान की राशि अलग-अलग दी जाती है। इस कारण किसान प्रदेश सरकार की योजना में अधिक रुचि नहीं लेते। इसमें 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में अधिक रुचि लेते हैं, क्योंकि उसमें 70 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इस विसंगति को दूर करने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है।
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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार बीज ग्राम योजना संचालित कर रही है। योजना के अंतर्गत किसानों को प्रमाणिक बीज उपलब्ध कराया जाता है। इसके अंतर्गत किसी गांव में कम से कम बीस किसानों को एकजुट कर उन्हें बीज उपलब्ध कराकर बीज की बुवाई से लेकर कटाई तक कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें गेहूं और धान की खेती पर अधिक फोकस होता है। एक साल बाद किसानों के खेतों में जो गेहूं या धान पैदा होता है, उसे प्रमाणिक बीज कहते हैं। इस बीज को दोबारा बुवाई के काम में लिया जा सकता है। इसी तरह राज्य सरकार भी योजना संचालित करती है।
किसानों को उन्नतशील धान और गेहूं के बीजों के वितरण पर मूल्य का 50 प्रतिशत और अधिकतम 1750 रुपये प्रति क्विंटल धान और 1600 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं पर अनुदान दिया जाता था। धान के बीज पर 250 और गेहूं के बीज पर 400 रुपये अतिरिक्त अनुदान प्रदेश सरकार देती है।
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केंद्र सरकार इस योजना के अंतर्गत 70 प्रतिशत अनुदान देती है। इस कारण किसान केंद्र की योजना में अधिक रुचि दिखाते हैं और राज्य सरकार की योजना में रुचि नहीं लेते हैं। योजना में प्रदेश सरकार के अनुदान को भी 70 प्रतिशत करने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। हालांकि, बीते रोज कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से योजना को बढ़ावा देने को कहा गया। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश सरकार बीजों पर अनुदान बढ़ा सकती है।
किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर प्राविधिक सहायक हैं। जो किसानों को बीज दिलवाने से लेकर बुवाई और फसल पैदा होने तक तकनीकी ज्ञान देने में मदद करते हैं।
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- के के सिंह, उप कृषि निदेशक
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