झांसी। निबंधन विभाग की ओर से जमीनों के नए सर्किल रेट निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईवे और संपर्क मार्ग किनारे वाली जमीनों के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इसके अलावा नई विकसित कॉलोनियों के इर्दगिर्द की जमीनों के सर्किल रेट भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल, इसे लेकर जिले की पांचों तहसीलों के सब रजिस्ट्रारों से रिपोर्ट मांगी गईं हैं। अगस्त में नए सर्किल रेट तय हो जाएंगे।
सरकार द्वारा तय की गई जमीन की कीमत (सर्किल रेट) के आधार पर ही निबंधन विभाग बैनामे के दौरान स्टांप ड्यूटी वसूलता है। जिलाधिकारी द्वारा हर साल सर्किल रेट तय किए जाते हैं। इसका उद्देश्य जमीन की बाजार में कीमत और सर्किल रेट को एक समान लाना होता है। हालांकि, कोविड काल में पिछले साल इसमें परिवर्तन नहीं किया गया था। लेकिन इस साल नए सर्किल रेट लागू करने की तैयारी है। निबंध विभाग की ओर से इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय जानकारों के अनुसार नई सड़कों से सटी जमीनों के सर्किल रेट में इस बार बढ़ोतरी हो सकती है। खासतौर पर झांसी - खजुराहो फोरलेन, जिसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। ये नया हाईवे झांसी जिले के बरुआसागर, मऊरानीपुर समेत कई क्षेत्रों से होकर गुजरा है। इस सड़क के निकलने से इसके आसपास की जमीनों की कीमत एकाएक से बढ़ गई है, जबकि सर्किल रेट पुराने ही चले आ रहे हैं। ऐसे में इस हाईवे से सटी जमीनों के सर्किल रेट बढ़ाए जा सकते हैं। इसके अलावा जिले में कई स्थानों पर नई कॉलोनियां विकसित हो गईं हैं। इससे उनके आसपास की जमीनों की बाजार में कीमत भी बढ़ गई है। लेकिन, सर्किल रेट पुराने ही चले आ रहे हैं। ऐसे जमीनों को भी चिह्नित कर नए सर्किल रेट निर्धारित किए जाएंगे।
सर्किल रेट परिवर्तन के लिए सब रजिस्ट्रारों से रिपोर्ट मांगी गई है। सब रजिस्ट्रार कार्यालय से रिपोर्ट आने के बाद जन सामान्य के लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। कुछ जमीनों के सर्किल रेट में विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर करने की तैयारी है। - प्रवीण सिंह, सहायक महानिरीक्षक - निबंधन
सर्किल रेट पर सात फीसदी तक स्टांप ड्यूटी
झांसी। सर्किल रेट के आधार पर निकलकर सामने आने वाली संपत्ति की कुल कीमत पर निबंधन विभाग सात प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी वसूलता है। शहरी क्षेत्र में पुरुषों के नाम होने वाले बैनामों पर सात प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी वसूली जाती है। दस लाख तक के बैनामों में महिलाओं को एक प्रतिशत की छूट दी जाती है। महिलाओं को शहरी क्षेत्र में छह और ग्रामीण क्षेत्र में चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी होती है।