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गोदाम में रखे रखे कबाड़ बन गए कूड़ा उठान के लिए खरीदे गए रिक्शा

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झांसी। घरों से कूड़ा उठाने को पहले करीब पांच लाख रुपये से कूड़ा रिक्शों की खरीद हुई लेकिन, तमाम रिक्शे बिना इस्तेमाल में आए ही स्क्रैप में तब्दील हो रहे हैं। उधर, कूड़ा उठाने के लिए नई गाड़ियों की फिर से खरीद कर ली गई जबकि कूड़ा उठाने का काम निजी एजेंसी को सौंपा जा चुका है।
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शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम स्मार्ट सिटी मिशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट समेत केंद्रीय निधि से मिली रकम का इस्तेमाल करता है लेकिन, अभी तक कूड़ा उठाने की व्यवस्था तक पुख्ता नहीं हो सकी। सिर्फ घरों से कूड़ा उठाने के नाम पर करोड़ों रुपये फूंके जा चुके। कुछ माह पहले नगर निगम ने करीब पांच लाख की लागत से पांच दर्जन कूड़ा रिक्शों की खरीद की थी। इनके जरिए वार्डों में सीधे घरों से कूड़ा उठवाना था लेकिन, इनकी खरीद किसके आदेश पर हुई इसका जवाब अफसर निगम सदन में भी नहीं दे सके। सिविल लाइंस समेत कुछ पॉश इलाकों में इनको उतारा गया लेकिन, अब अधिकांश रिक्शे सड़कों से गायब हो चुके। वहीं, बिजौली में स्वास्थ्य विभाग के अस्थाई गोदाम में यह रिक्शे डंप पड़े हैं। अब इन रिक्शों की जगह फिर से नई गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। रिक्शों की खरीद के समय निगम प्रशासन का तर्क इसके जरिए ईधन की खपत कम करने का था लेकिन, स्मार्ट सिटी मिशन से जिन गाड़ियों की खरीद हो रही, वह गाड़ियां डीजल आधारित हैं। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि बिजौली में स्क्रैप हो रहे रिक्शों की उनको जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी।
खरीद को लेकर सदन में हुआ था हंगामा
इन कूड़ा रिक्शों की खरीद को लेकर निगम सदन में पार्षदों ने भी जमकर हंगामा काटा था। पार्षदों ने खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए खरीद का आदेश देने वाले अधिकारी का नाम पूछा था लेकिन, कई माह बीत जाने के बावजूद यह आदेश अफसरों ने सार्वजनिक नहीं किए। भाजपा पार्षद किशोरी रायकवार ने वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए महापौर से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
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स्मार्ट सिटी मिशन से खर्च हो रहे 39.21 करोड़
शहर को कूड़ा मुक्त करने के लिए स्मार्ट सिटी मिशन से 39.21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। इसके जरिए यहां नया प्लांट बनाए जाने के साथ ही नई मशीनों की भी खरीद होनी है।
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