झांसी। वाणिज्य कर विभाग के अफसरों ने बुंदेलखंड के पांच सौ बड़े कारोबारियों की गोपनीय जांच शुरू की है। अभी तक जो रिपोर्ट तैयार हुई है उसके अनुसार अफसरों को भरोसा है कि अगर गहनता से जांच की जाए तो इन कारोबारियों से और अधिक टैक्स वसूला जा सकता है, जो साल में 100 करोड़ तक हो सकता है। इनमें अधिकांश ऐसे कारोबारी हैं जो ऐसी वस्तुओं का कारोबार करते हैं जिनकी टैक्स दर ज्यादा हैं। ऐसी वस्तुओं में टैक्स चोरी करके बड़े स्तर पर पैसा कमाया जा सकता है।
जीएसटी इंटेलीजेंस और आयकर विभाग ने जिस तरह से कानपुर और कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के पास से अरबों रुपये की संपत्ति बरामद की है। जांच में सामने आया कि कारोबार के हिसाब से इत्र कारोबारी टैक्स जमा नहीं कर रहा था। वाणिज्य कर अफसरों का मानना है कि बुंदेलखंड में ऐसे ही तमाम कारोबारी हो सकते हैं जो टैक्स तो जमा कर रहे हैं, लेकिन उसी कारोबार में टैक्स चोरी करके दोगुना लाभ कमा रहे हैं।
अभी बुंदेलखंड के झांसी जोन के अंतर्गत झांसी, ललितपुर, उरई जालौन, महोबा, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट जिले में 61 हजार 134 पंजीकृत व्यापारी हैं। इनमें 36202 व्यापारी जीएसटी व 23932 सीजीएसटी में पंजीकृत हैं। इनमें पांच सौ ऐसे कारोबारी हैं जो ऐसी वस्तुओं का कारोबार करते हैं जिनकी टैक्स दर ज्यादा हैं। इन सभी कारोबारियों का आलीशान रहन सहन व खर्चे बड़े उद्योगपतियों की तरह हैं। अफसरों को भरोसा है कि अगर इन कारोबारियों के व्यापार की गहनता से जांच की जाए तो साल में 100 करोड़ से अधिक का राजस्व और मिल सकता है।
- विशेष अनुसंधान शाखा लगातार सर्वे कर टैक्स बढ़ाने का काम कर रही है। साथ ही अब ऐसे कारोबारियों की भी गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है तो ज्यादा टैक्स देने वालीं वस्तुओं का कारोबार करते हैं। खनन माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन व खनिज विभाग के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
भानु प्रकाश, जोनल आयुक्त।
इन वस्तुओं पर लगता है अधिक टैक्स
आयरन स्टील, पान मसाला, मैंथा ऑयल, बालू, गिट्टी समेत 15 से अधिक वस्तुओं पर सबसे अधिक टैक्स लगता है। अगर ऐसी वस्तुओं में टैक्स चोरी की जाए तो सीधा दोगुना फायदा होता है।
साल का 1346 करोड़ का लक्ष
वाणिज्यकर झांसी जोन के अंतर्गत झांसी, ललितपुर, जालौन, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर व बांदा जनपद आते हैं। इस बार जोन को सालाना 1346 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। कोरोना महामारी में धीमे चल रहे बाजार के चलते माह का आधा लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा था। अप्रैल से नवंबर तक 650 करोड़ ही राजस्व प्राप्त हो सका। हर साल 70 से 80 फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो पाता है।