आय अधिक होने के बाद भी जिले के 118 किसान राशन की सरकारी दुकानों से मुफ्त में राशन ले रहे थे। मामला तब पकड़ में आया जब किसानों ने सरकार को तीन लाख से अधिक धनराशि की फसल बेचा था। शासन ने प्रकरण की जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सिर्फ तीन ही किसान पात्र पाए गए। जबकि जिले के 115 किसान अपात्र पाए गए हैं। जिला पूर्ति विभाग द्वारा सभी के राशन कार्डों को निरस्त कर दिया गया है।
जिले भर में सरकारी राशन की दुकानों की संख्या 780 है, जिसमें 43831 अंत्योदय के राशन कार्ड हैं। वहीं, पात्र गृहस्थी के लगभग तीन लाख से अधिक यूनिट खाद्यान्न वितरित किया जाता है। सरकारी नियम के अनुसार राशन कार्ड धारक के परिवार की कुल आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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जांच के आदेश
इसके अलावा परिवार के किसी भी सदस्य के पास चार पहिया वाहन, सौ मीटर से अधिक क्षेत्रफल का मकान, सात एकड़ से अधिक जमीन के साथ ही घर में एयर कंडीशन नहीं होने का नियम है। लेकिन जिले के कई लोग सरकारी राशन की दुकानों से मुफ्त में राशन ले रहे थे। इस पर शासन ने जांच के आदेश जारी किए थे।
राशन कार्डों को निरस्त
जांच के दौरान जिले के 115 किसान अपात्र पाए गए हैं। जिनके राशन कार्डों को निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी तीर्थराज यादव ने बताया कि शासन के आदेशानुसार जिले के 118 किसानों की जांच की गई थी। जांच में 115 किसान अपात्र पाए गए हैं। सभी के राशन कार्डों को निरस्त कर दिया गया है। शासन के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।