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दीपावली के बाद होती है चिरगांव में रामलीला

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झांसी। बुंदेलखंड में रामलीला मंचन की भी अपनी खूबियां हैं। मुंशी अजमेरी व राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की नगरी चिरगांव में रामलीला का मंचन दीपावली के बाद होता है। विशेष बात यह है कि यहां आकाश वाले दृश्यों का खूबसूरती से मंचन किया जाता है। इनमें संजीवनी बूटी लाते हुए हनुमान जी व राम कथा में वर्णित अन्य प्रसंग कलाकार इतनी खूबसूरती से निभाते हैं कि देखने वाले देखते रह जाते हैं।
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चिरगांव में रामलीला मंचन की शुरुआत 1936 के आसपास हुई थी। मुंशी अजमेरी व मैथिलीशरण गुप्त आदि विद्वानों ने मंचन की परंपरा को विकसित किया। श्रीराम यश प्रचारिणी समिति के पदाधिकारियों के अनुसार पूस माह के दौरान किसान, व्यापारी और आम जनता सभी लगभग फुरसत में रहते हैं। ऐसे में नवंबर से दिसंबर के मध्य शुभ मुहूर्त में यहां रामलीला का मंचन किया जाता है। कोरोना के कारण पिछले साल मंचन नहीं हो सका था लेकिन इस बार मंचन की तैयारियां की जा रही हैं। यहां की रामलीला को देखने के लिए कई गांवों के दर्शक जुटते हैं और सभी समाजों के लोग एवं कलाकार उत्साह से लीला में अपना सहयोग देते हैं।
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रामलीला का मंचन दीपावली के बाद नवंबर-दिसंबर में होता है। आकाश वाले दृश्यों का खूबसूरती से मंचन किया जाता है।
रमाशंकर घंताल, अध्यक्ष
मंचन में नगर के सभी नागरिक अपना पूरा सहयोग देते हैं। कई गांव के लोग रामलीला को देखने के लिए उत्साहित रहते हैं।
रविकांत कौशिक, निर्देशक
मुंशी अजमेरी, मैथिलीशरण गुप्त, गंगा प्रसाद आदि ने चिरगांव की रामलीला को विकसित किया है। मंचन की तैयारियां हो रही है।
रामेश्वर साहू, वरिष्ठ कलाकार एवं ऑडिटर
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