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रेलवे बोर्ड ने पलटा फैसला, नई कोच फैक्टरी का नहीं थमेगा काम

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झांसी। रेलवे बोर्ड ने भविष्य की जरूरत को देखते हुए प्रेमनगर में बन रही नई कोच फैक्टरी के निर्माण कार्य को तीन साल के लिए फ्रीज (बंद) करने के अपने फैसले को बदल दिया है। बोर्ड कमेटी ने काम को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इससे फैक्टरी को बजट मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, फ्रीज के आदेश के बाद भी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने निर्माण कार्य को बंद नहीं कराया था। संबंधित कंपनी लगातार काम कर रही है।
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भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड की निगरानी में प्रेमनगर के नगरा हाट के मैदान के पास 74 एकड़ में बनने वाली नई कोच फैक्टरी का काम तेजी के साथ चल रहा है। जमीन के समतलीकरण व चारदीवारी बनाने के बाद अंदर शेड बनने का काम शुरू हो गया है। फैक्टरी के निर्माण तमिलनाडु की यूआरसी कंपनी कर रही है।
विगत 18 नवंबर 2020 को रेलवे बोर्ड ने फैक्टरी के निर्माण को तीन साल के लिए फ्रीज कर दिया था। बोर्ड का कहना था कि अभी फैक्टरी के निर्माण की आवश्यकता नहीं है। चूंकि, निर्माण कार्य चालू हो गया था, इससे कंपनी अधिकारी पशोपेश में आ गए थे, लेकिन आरवीएनएल के अधिकारियों ने उनको भरोसा दिलाया और निर्माण कार्य को रुकने नहीं दिया। आरवीएनएल ने अपने बजट से निर्माण कार्य चालू रखा। वहीं, इस मामले को लेकर आरवीएनएल व मुख्यालय के अधिकारी रेलवे बोर्ड से लगातार पत्राचार कर रहे थे।
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रेलवे बोर्ड ने इस मामले की दोबारा समीक्षा की। समीक्षा के तय हुआ कि भविष्य की जरूरत के हिसाब से फैक्टरी का निर्माण होना जरूरी है। इसलिए इस पर लगाई गई पाबंदी को हटा लिया जाए। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के ईडीएमई रवि जैन ने उत्तर मध्य रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मेकेनिकल इंजीनियर को आदेश जारी कर दिया है।
नहीं मिल पा रहा था बिजली कनेक्शन
नई कोच फैक्टरी के लिए वर्कशॉप से बिजली कनेक्शन नहीं मिल पा रहा था। इससे कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी। मुख्य कारखाना प्रबंधक का कहना था कि रेलवे बोर्ड ने निर्माण कार्य को फ्रीज कर दिया है। इस कारण कनेक्शन देना मुमकिन नहीं है। इसी तरह अन्य कई इश्यू सामने आ रहे थे। कई राजनीतिक संगठन भी निर्माण कार्य पर सवाल उठा रहे थे। यह फैसला आने के बाद अब उक्त कार्यों में कोई व्यवधान नहीं पड़ेगा।
यह भी जानिए
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- केंद्र सरकार ने रेल कोच नवीनीकरण कारखाना के निर्माण की 2018 में मंजूरी दी थी।
- 339 करोड़ की योजना हैं, जिसमें 37 करोड़ जीएसटी शामिल हैं।
- फैक्टरी का निर्माण 74 एकड़ जमीन पर होना है।
- तमिलनाडु की यूआरसी कंपनी को काम का ठेका सितंबर में दिया गया।
- कोरोना की वजह से जून 2020 में टेंडर खुला। पहले मार्च में खुलना था।
- फैक्टरी में 1400 पद कर्मचारियों के सृजित होंगे।
- फैक्टरी का निर्माण 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
एलएचबी कोचों का होगा निर्माण
नई कोच फैक्टरी में लिंके हॉफमेन बुश (एलएचबी) डिब्बों का निर्माण होगा। यह एक ऐसी आधुनिक प्रौद्योगिकी है, जो ट्रेन के पटरी से उतरने के दौरान डिब्बों को पलटने से रोकती है। रेल मंत्रालय ने पारंपरिक आईसीएफ डिब्बों का निर्माण 2019 से पूरी तरह बंद कर दिया। सिर्फ एलएचबी डिब्बों का उपयोग होगा। इन कोचों की गति 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इनमें एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण यह डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते। यह डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्यूमीनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ डिब्बे माइल्ड स्टील के बने होते हैं। यह डिब्बे अलग तरह की कपलिंग से जोड़े जाते हैं। इन दिनों कोच कारखानों में एलएचबी डिब्बों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इन डिब्बों की पीरिओडिक ओवर हालिंग भी होगी।
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