अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला कारागार में बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। 11 बंदियों ने जहां प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला ले लिया है वहीं एक बड़ी संख्या ऐसे बंदियों की है जिन्होंने प्राथमिक स्तर पर छूट चुकी अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कर दी है। जेल प्रशासन इसमें इनका सहयोगी बना है। इन बंदियों की बाकायदा नियमित क्लास चलती है। जेल अफसरों के मुताबिक अगले साल इनकी परीक्षाएं होंगी।
झांसी जेल में हत्या, दुष्कर्म,पास्को, डकैती, रंगदारी जैसे तमाम गंभीर अपराध में सिद्ध दोष एवं विचाराधीन बंदी रखे गए हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक इनमें करीब 246 बंदी निरक्षर हैं जबकि 63 बंदी ऐसे हैं जिन्होंने अपराध जगत में कदम रखने के बाद से पढ़ाई-लिखाई से तौबा कर ली थी। इनमें अधिकांश विचाराधीन बंदी हैं। इनको पढ़ा-लिखाकर समाज की मुख्य धारा में वापस लाने का जेल प्रशासन ने प्रयास शुरू किया है।
जिन बंदियों की प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं हो सकी, उनके लिए अलग से कक्षाएं लगाई जा रही हैं। इनमें कक्षा एक से पांच तक में 17, कक्षा 6 में चार, कक्षा नौ में दो बंदियों ने अपनी पढ़ाई दोबारा से आरंभ की है। इनकी बाकायदा नियमित कक्षा लगती है। शासकीय विद्यालय में तैनात शिक्षक इनको पढ़ाने आते हैं। उनके साथ ही डिप्टी जेलर प्रकाश बंसल, सुरेश मिश्र, जयवीर सिंह चौहान की टीम भी क्लास चलाती है। इसी तरह प्रोफेशनल कोर्स में भी बंदियों की दिलचस्पी देखने को मिल रही है। 11 बंदी इग्नू से मान्यता प्राप्त प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।
इनसेट
171 बंदी बन गए साक्षर
जेल के अंदर विभिन्न मामलों में बंद 171 बंदियों को साक्षर बना दिया गया है। पहले यह बंदी अपने कागजात खुद नहीं पढ़ पाते थे लेकिन, अब धीरे-धीरे अपने कागजात समेत धार्मिक किताबें भी पढ़ने लगे हैं।
00000
कोशिश की जा रही है कि जो बंदी किसी वजह से पढ़ नहीं सके, उनकी शिक्षा पूरी हो सके। इनकी क्लास चलती है। नियमित समय पर इनकी परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। इसके माध्यम से वह समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे।
विनोद कुमार
वरिष्ठ जेल अधीक्षक