बिजली विभाग संविदा पर रखेगा मीटर रीडर
- फोटो : demo
बिजली विभाग मीटर रीडरों को बाहरी एजेंसी से न लेकर अब उनकी भर्ती खुद ही करने का प्लान तैयार कर रहा है। इसके लिए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक से परमीशन मांगी गई है। अफसरों का मानना है कि एजेंसियां कर्मचारियों को कम वेतन देती हैं, इस कारण वह ईमानदारी से काम नहीं करते हैं।
बिजली विभाग ने मीटर रीडर और ऑपरेटर आउटसोर्स पर आगरा की महालक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड आगरा के माध्यम से रखे हैं। एजेंसी का तीन साल का ठेका मार्च में खत्म होने जा रहा है। ऐसे में विभाग ने ठेका खत्म होने पर स्वयं संविदा पर मीटर रीडर और ऑपरेटर रखने की तैयारी कर ली है। अभी कंपनी मीटर रीडरों को 3800 रुपये और ऑपरेटरों को 4500 रुपये प्रति माह वेतन दे रही है। बिजली अधिकारियों का मानना है कि कम वेतन में संविदा कर्मचारियों से ईमानदारी से काम कराना संभव नहीं है। यहीं कारण है कि महानगर में बिजली चोरी पर पूर्ण रूप से लगाम नहीं लग पा रहा है। अगर वे खुद अपने स्तर पर मीटर रीडरों की भर्ती करेंगे तो उनको मानक अनुरूप वेतन मिल सकेगा। विभाग अभी ठेकेदार की मदद से सबस्टेशनों पर तैनात संविदा कर्मचारियों को दस हजार रुपये वेतन प्रतिमाह व अन्य सुविधाएं प्रदान करता है। श्रम विभाग के नियमों को पूरा करने वाले ठेकेदारों को ही सबस्टेशनों पर संविदा कर्मियों को तैनात करने का ठेका दिया जाता है।
‘स्थानीय स्तर पर मीटर रीडरों की तैनाती करने की प्लानिंग बनाई गई है। इसके लिए प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर परमीशन मांगी गई है।’
पंकज अग्रवाल, अधिशासी अभियंता (द्वितीय)।
चार माह का नहीं मिला वेतन
कंपनी अपने मीटर रीडर और ऑपरेटरों को कभी समय पर वेतन नहीं देती है। जनवरी तक छह माह का वेतन बकाया चल रहा था। विद्युत अधिकारियों के दबाव डालने पर कंपनी ने फरवरी में तीन माह के वेतन भुगतान किया। अभी भी कर्मचारियों का चार माह का वेतन लटका हुआ है। ऐसी स्थिति शुरूआत से ही चल रही है। वेतन को लेकर कर्मचारियों को कई बार आंदोलित भी होना पड़ा।