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23 लापता युवतियों का पता नहीं लगा पाई पुलिस

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झांसी। युवती को तलाश करने में नाकाम रही यूपी पुलिस के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने यूं ही तीखी टिप्पणी नहीं की है, बल्कि इसकी वाजिब वजह है। इसका अंदाजा झांसी को देखकर लगाया जा सकता है। यहां पिछले पांच सालों के दरम्यान लापता हुईं युवतियों में से 23 ऐसी हैं, जिनका पुलिस पता नहीं लगा पाई है।
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गोरखपुर से लापता हुई एक युवती को यूपी पुलिस दो महीने में नहीं खोज पाई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उसे दो दिन में ही ढूंढ़ निकाला। इस पर शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत ने यूपी पुलिस के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि क्या जब अदालत कहेगी, तब ही पुलिस पीड़ित तो ढूंढ़ेगी? न्यायालय की यह बात झांसी में भी एकदम सटीक बैठती है। जिले से पिछले पांच सालों के दरम्यान लापता हुईं युवतियों में से 23 ऐसी हैं, जिनकी पुलिस तलाश नहीं कर पाई है। इनमें से कई मामलों में तो अपहरण तक के मुकदमे दर्ज हैं। बावजूद, उन्हें खोजा नहीं जा सका है। परिवार वाले आज भी इन्हें ढूंढने के लिए एक शहर से दूसरे शहर की खाक छान रहे हैं। जहां से भी थोड़ी बहुत सूचना मिल जाती है वहां पहुंच जाते हैं। लेकिन हाथ खाली ही बने हुए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि सभी की तलाश की जा रही है। आसपास के जिलों को भी सूचना दे दी गई है। कई लापता युवतियों का पता भी लगाया जा चुका है और उन्हें परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है।
पुलिस लापता लोगों की तलाश में लगातार जुटी हुई है। जब तक लापता व्यक्ति बरामद नहीं होता, तब तक उस मामले की विवेचना बंद नहीं की जाती है। जल्द ही सभी का पता लगा लिया जाएगा। इस काम में लगातार टीमें जुटी हुईं हैं।
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- शिवहरि मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
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