काशी से झांसी का रिश्ता जोड़ बुंदेलखंड को साधेंगे पीएम मोदी
झांसी। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर 19 नवंबर को झांसी आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी से झांसी का रिश्ता जोड़कर बुंदेलखंड और आधी आबादी को साधेंगे। काशी रानी का जन्म स्थान और झांसी कर्मभूमी रही है। स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव पर पीएम आजादी की प्रथम दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई को लेकर कोई बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जब-जब झांसी का दौरा हुआ, उन्होंने रानी की कर्मभूमि और बुंदेलखंड से खुद के बेहद लगाव होने की बात की। अब फिर से वो रानी की जयंती पर झांसी आ रहे हैं। मगर इस बार खास बात ये है कि आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। रानी लक्ष्मीबाई ने ही सबसे पहले स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल फूंका था। 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का ऐलान करते हुए अपने पराक्रम का परचम लहराया था और फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे। इस मायने रानी की जयंती पर प्रधानमंत्री का दौरा बेहद खास मायने रखता है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री रानी से जुड़ी किसी बड़ी योजना की सौगात दे सकते हैं। साथ ही उनका संसदीय क्षेत्र काशी रानी का जन्म स्थान रहा है, ऐसे में वह लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झांसी के साथ रिश्ता जोड़कर बुंदेलखंड और आधी आबादी को साध सकते हैं।
किले को हेरिटेज के तौर पर किया जा सकता विकसित
रानी लक्ष्मीबाई के किले को हेरिटेज के तौर पर विकसित करने और यहां के पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए कई बार बात हो चुकी है। भाजपा नेता से लेकर संघ तक इस पर जोर देता रहा है। ऐसे में पीएम के दौरे से फिर से आस जग गई है कि रानी के किले को संवारने के लिए बड़ा कदम उठाया जा सकता है। अभी भी किले में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। ऐसे में काफी बदलाव नजर भी आ रहा है।